अब बिना अनुमति नहीं कटेंगे पेड़,खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाने की तैयारी में राजस्थान सरकार
राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है।

राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए नया कानून लाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विधानसभा में दिए गए आश्वासन के बाद सरकार ने ‘वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ का प्रारूप तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है। यह समिति राज्य में पेड़ों की कटाई पर सख्त नियमों वाला कानून तैयार करेगी, जिससे खासतौर पर खेजड़ी जैसे पारंपरिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कानून का मसौदा तैयार करेगी 6 सदस्यीय समिति
मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, कानून मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति प्रस्तावित ‘वृक्ष संरक्षण अधिनियम’ का ड्राफ्ट तैयार करेगी।
समिति में राजस्व मंत्री हेमंत मीणा और वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा प्रमुख शासन सचिव (विधि) राघवेंद्र काछवाल, अतिरिक्त महाधिवक्ता महावीर विश्नोई और राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता कुणाल विश्नोई को भी समिति में स्थान दिया गया है।
सरकार ने इस समिति का प्रशासनिक विभाग राजस्व विभाग को बनाया है। ऐसे में राजस्व विभाग के शासन सचिव समिति के सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे और कानून के मसौदे को तैयार करने की प्रक्रिया का समन्वय करेंगे।
एक महीने में सरकार को सौंपेगी ड्राफ्ट
सरकार ने समिति को निर्देश दिए हैं कि वह अन्य राज्यों में लागू वृक्ष संरक्षण कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन करे। साथ ही विभिन्न स्टेकहोल्डर्स—पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदायों—की राय भी शामिल की जाए।
समिति को यह भी देखना होगा कि वृक्ष संरक्षण से जुड़े विभिन्न न्यायिक फैसलों और मौजूदा कानूनी प्रावधानों में क्या व्यवस्थाएं हैं। इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद समिति एक महीने के भीतर प्रस्तावित कानून का मसौदा तैयार कर सरकार को सौंपेगी।
इसके बाद राज्य सरकार विधि विशेषज्ञों की राय लेकर इस मसौदे को अंतिम रूप देगी और इसे विधानसभा में पेश करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
मंत्री निवास पर हुई पहली बैठक
समिति के गठन के साथ ही सोमवार को कानून मंत्री जोगाराम पटेल के निवास पर इसकी पहली बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में वृक्ष संरक्षण कानून की रूपरेखा और इसके दायरे पर प्रारंभिक चर्चा की गई।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रस्तावित कानून ऐसा हो जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विकास कार्यों की जरूरतों के बीच संतुलन भी बनाए रखे।
अभी केवल कृषि भूमि पर ही है प्रावधान
वर्तमान में राजस्थान में पेड़ों की कटाई से जुड़े प्रावधान मुख्य रूप से काश्तकारी कानून के तहत आते हैं। इस कानून में केवल कृषि भूमि पर पेड़ों की कटाई की अनुमति से संबंधित नियम और अवैध कटाई पर दंड का प्रावधान है।
लेकिन गैर-कृषि उपयोग वाली जमीनों—जैसे आवंटित, रूपांतरित, अधिग्रहीत और आबादी भूमि—पर वृक्ष संरक्षण के लिए कोई व्यापक कानून नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार नया कानून लाने की तैयारी कर रही है।
गैर-कृषि भूमि पर भी होंगे सख्त नियम
प्रस्तावित कानून के तहत राज्य की सभी प्रकार की गैर-कृषि उपयोग वाली भूमियों पर भी पेड़ों की कटाई को नियंत्रित किया जाएगा।
ऐसी जमीनों पर किसी भी पेड़ को हटाने के लिए अधिकृत अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही केवल उतने ही पेड़ हटाने की अनुमति दी जाएगी, जितना किसी परियोजना या निर्माण कार्य के लिए न्यूनतम आवश्यक होगा।
सरकार का मानना है कि इससे अनियंत्रित वृक्ष कटाई पर रोक लगेगी और मरुस्थलीय प्रदेश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
खेजड़ी कटाई के विरोध से शुरू हुई पहल
दरअसल, हाल के महीनों में बीकानेर सहित कई मरुस्थलीय जिलों में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए बड़ी संख्या में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई का मुद्दा सामने आया था। पर्यावरण प्रेमियों और विश्नोई समाज ने इस पर कड़ा विरोध जताया था।
बीकानेर में विश्नोई धर्मशाला के पास संतों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने 11 दिनों तक महापड़ाव और अनशन किया था। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने और उसकी कटाई पर रोक लगाने की मांग था।
आंदोलन के बाद 12 फरवरी 2026 को सरकार के प्रतिनिधिमंडल और संतों के बीच वार्ता हुई। इसके बाद राजस्व विभाग ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया था।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम
अब सरकार द्वारा वृक्ष संरक्षण कानून बनाने की पहल को उसी आंदोलन का परिणाम माना जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह कानून प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो यह राजस्थान में हरित आवरण बढ़ाने और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
मरुस्थलीय पारिस्थितिकी में खेजड़ी का विशेष महत्व है। यह वृक्ष न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि पशुओं के लिए चारा और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका का भी महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। ऐसे में राज्य सरकार की यह पहल पर्यावरण और परंपरा दोनों के संरक्षण की दिशा में अहम मानी जा रही है।
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