राजस्थान में फार्महाउस से चल रहा था IPL सट्टा रैकेट, पुलिस की रेड में 6 दबोचे, 12 करोड़ का हिसाब बरामद
राजस्थान के प्रतापगढ़ में आईपीएल मैचों की आड़ में चल रहे हाईटेक सट्टेबाजी रैकेट का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शहर के बीचों-बीच एक फार्महाउस को “सट्टा कंट्रोल रूम” बनाकर करोड़ों का खेल खेला जा रहा था। पुलिस की दबिश में इस संगठित गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं

राजस्थान के प्रतापगढ़ में आईपीएल मैचों की आड़ में चल रहे हाईटेक सट्टेबाजी रैकेट का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। शहर के बीचों-बीच एक फार्महाउस को “सट्टा कंट्रोल रूम” बनाकर करोड़ों का खेल खेला जा रहा था। पुलिस की दबिश में इस संगठित गिरोह के 6 सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि मास्टरमाइंड अब भी फरार है। शुरुआती जांच में करीब 12 करोड़ 75 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ है, जो इस अवैध नेटवर्क की गहराई और पहुंच को दर्शाता है।
फार्महाउस में ‘डिजिटल जुए’ का अड्डा
पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहर के सर्वोदय स्कूल के पास स्थित एक फार्महाउस में आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन किया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा।
जब टीम मौके पर पहुंची, तो फार्महाउस की पहली मंजिल पर बने हॉल में 6 युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए लाइव सट्टा संचालित करते मिले। पुलिस को देखते ही सभी ने भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते कोई बच नहीं सका।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से चलता था पूरा खेल
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी पिछले 8-10 दिनों से संगठित तरीके से आईपीएल मैचों पर दांव लगवा रहे थे। इसके लिए Star66-co और Diamondexch.com जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था।
गिरोह ग्राहकों को अलग-अलग आईडी उपलब्ध कराता था, जिनमें रुपये जमा कर पॉइंट्स में सट्टा लगाया जाता था। जीत की स्थिति में भुगतान फोनपे जैसी डिजिटल सेवाओं के जरिए तुरंत कर दिया जाता था। इस तरह पूरा नेटवर्क डिजिटल माध्यमों के जरिए बिना किसी भौतिक लेन-देन के संचालित हो रहा था।
सीसीटीवी से कंट्रोल करता था मास्टरमाइंड
इस रैकेट का मुख्य सरगना अंकित डोशी बताया जा रहा है, जो छापे के समय मौके पर मौजूद नहीं था। पुलिस के अनुसार, वह सीसीटीवी कैमरों के जरिए दूर बैठकर पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहा था।
यह खुलासा इस बात की ओर इशारा करता है कि सट्टेबाजी अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर पूरी तरह तकनीक आधारित और संगठित अपराध का रूप ले चुकी है, जहां सरगना खुद को सुरक्षित रखते हुए नेटवर्क ऑपरेट करता है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का जखीरा बरामद
छापे के दौरान पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सामग्री जब्त की है। इसमें 6 लैपटॉप, 38 मोबाइल फोन, 48 सिम कार्ड, चार्जर, वाई-फाई डिवाइस, सीसीटीवी कैमरे, एटीएम कार्ड, पांच लाल डायरियां और एक रजिस्टर शामिल हैं।
जब्त दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की जांच में अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 12 करोड़ 54 लाख रुपये के लेन-देन का विस्तृत हिसाब मिला है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसकी पहुंच स्थानीय स्तर से कहीं आगे तक फैली हो सकती है।
संगठित गिरोह, डिजिटल ट्रेल और हवाला कनेक्शन की जांच
पुलिस अब इस मामले को केवल सट्टेबाजी तक सीमित नहीं मान रही है। जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि कहीं इस नेटवर्क का संबंध हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य संगठित अपराधों से तो नहीं है।
इतनी बड़ी रकम का डिजिटल लेन-देन और अलग-अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल इस बात की ओर संकेत करता है कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने और ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग से बचने के लिए सुनियोजित रणनीति अपना रहे थे।
कानूनी कार्रवाई और फरार सरगना की तलाश जारी
पुलिस ने सभी गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023, आरपीजीओ एक्ट और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही मुख्य सरगना अंकित डोशी की तलाश में अलग-अलग टीमें जुटाई गई हैं।
पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर अन्य जुड़े लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।
जिला पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य ने बताया कि “यह एक संगठित और तकनीकी रूप से संचालित सट्टेबाजी नेटवर्क है। जब्त किए गए डिजिटल डेटा के आधार पर आगे की जांच की जा रही है और मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।”
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