राजस्थान की IAS डॉ. अंजलि राजोरिया पर संसद में जमकर गरजे BJP सांसद मन्नालाल रावत
राजस्थान कैडर की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी डॉ. अंजलि राजोरिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला राज्य स्तर से निकलकर सीधे संसद तक पहुंच गया है।

राजस्थान कैडर की तेजतर्रार आईएएस अधिकारी डॉ. अंजलि राजोरिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला राज्य स्तर से निकलकर सीधे संसद तक पहुंच गया है। उदयपुर से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने संसद के शून्यकाल के दौरान प्रतापगढ़ की जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
सांसद रावत ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) के तहत स्वीकृत विकास कार्यों को जानबूझकर रोका है। उन्होंने कहा कि यह रवैया न केवल विकास में बाधा है, बल्कि जनहित के खिलाफ भी है।
सांसद ने संसद में उठाया मुद्दा
शून्यकाल के दौरान अपनी बात रखते हुए मन्नालाल रावत ने कहा कि उनकी लोकसभा क्षेत्र में चार DMF संचालित होते हैं, जिनमें प्रतापगढ़ का DMF विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि एक बैठक में 54 विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई थी, जिन्हें शिक्षा और अन्य जरूरी क्षेत्रों के लिए अहम माना गया था।
रावत के अनुसार, इन सभी कार्यों के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद प्रतापगढ़ कलेक्टर ने केवल 3 कार्यों को ही आगे बढ़ाया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय प्रशासनिक विवेक के बजाय व्यक्तिगत अहंकार के चलते लिया गया है।
सांसद ने यह भी कहा कि इस तरह के फैसलों से प्रधानमंत्री के विकास के विजन को भी नुकसान पहुंचता है और क्षेत्रीय विकास बाधित होता है।
DMF अध्यक्ष पद को लेकर मांग
मन्नालाल रावत ने संसद में यह मांग भी रखी कि DMF का अध्यक्ष लोकसभा सांसद को बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से मंजूरी मिल सकेगी और जनता को सीधा लाभ पहुंचेगा।
इसके साथ ही उन्होंने डॉ. अंजलि राजोरिया पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
लंबे समय से चल रहा विवाद
यह विवाद नया नहीं है। जानकारी के अनुसार, सांसद रावत और डॉ. अंजलि राजोरिया के बीच DMF फंड को लेकर दिसंबर 2025 से लगातार तनातनी बनी हुई है। इस मुद्दे को लेकर सांसद पहले भी मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिख चुके हैं।
दूसरी ओर, डॉ. अंजलि राजोरिया ने भी इन आरोपों का जवाब देते हुए सांसद पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इससे दोनों पक्षों के बीच विवाद और गहरा गया।
कौन हैं डॉ. अंजलि राजोरिया?
डॉ. अंजलि राजोरिया 2015 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं और प्रशासनिक सेवा में आने से पहले MBBS डॉक्टर रह चुकी हैं।
अपनी सख्त कार्यशैली और स्पष्ट निर्णयों के लिए वे अक्सर चर्चा में रहती हैं। जनवरी 2024 से वे प्रतापगढ़ जिले में जिला कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले भी वे राज्य सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे चुकी हैं।
पहले भी हो चुके हैं टकराव
डॉ. राजोरिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका नगर परिषद सभापति रामकन्या गुर्जर और उनके परिवार के साथ भी टकराव हो चुका है।
सभापति के पति प्रहलाद गुर्जर ने सोशल मीडिया पर कलेक्टर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके जवाब में डॉ. राजोरिया ने भी पलटवार करते हुए प्रहलाद गुर्जर के खिलाफ कई आपराधिक मामलों का जिक्र किया था।
राजनीतिक बनाम प्रशासनिक टकराव
इस पूरे मामले को अब राजनीतिक बनाम प्रशासनिक टकराव के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर जहां जनप्रतिनिधि विकास कार्यों में तेजी लाने की बात कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक स्तर पर निर्णय प्रक्रिया और नियमों का हवाला दिया जा रहा है।
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