राजस्थान में 5 बार काउंसलिंग रद्द, DPC अटकी; डोटासरा ने शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर शिक्षा का मुद्दा गरमा गया है। गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है।

राजस्थान की सियासत में एक बार फिर शिक्षा का मुद्दा गरमा गया है। गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर किए गए अपने पोस्ट में डोटासरा ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक निष्क्रियता और ठोस योजना के अभाव में राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
5 बार टली काउंसलिंग, 3801 पद प्रभावित
डोटासरा ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नजदीक है, लेकिन विभाग अब तक 3801 उपप्रधानाचार्यों के पदस्थापन के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काउंसलिंग पांच बार स्थगित की जा चुकी है, जिससे हजारों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सितंबर 2025 में 11,822 व्याख्याताओं को उपप्रधानाचार्य पद पर पदोन्नत किया गया था, लेकिन आज तक उन्हें स्कूलों में जॉइनिंग नहीं मिल पाई है। डोटासरा के मुताबिक, यह स्थिति सरकार की कार्यशैली और योजना की कमी को दर्शाती है।
शिक्षा व्यवस्था में विसंगतियां उजागर
पूर्व शिक्षा मंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं को उजागर करते हुए कहा कि ट्रांसफर पॉलिसी और कोर्ट के स्टे के कारण कई जगह असंतुलित स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि कहीं एक ही स्कूल में तीन से चार उपप्रधानाचार्य तैनात हैं, तो कहीं दो-दो प्रधानाचार्य एक साथ काम कर रहे हैं।
इसके विपरीत, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। डोटासरा ने इसे शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए कहा कि इससे छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
लंबित डीपीसी पर सरकार घिरी
डोटासरा ने विभाग में लंबित पदोन्नतियों (DPC) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि तृतीय श्रेणी से वरिष्ठ अध्यापक बनने की पांच डीपीसी लंबित हैं, जबकि वरिष्ठ अध्यापक से व्याख्याता बनने की तीन डीपीसी भी अटकी हुई हैं।
इसके अलावा शारीरिक शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, प्रबोधक और प्राचार्य पदों की डीपीसी भी लंबे समय से लंबित है। उन्होंने कहा कि हजारों शिक्षक पदोन्नति की राह देख रहे हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
जर्जर स्कूल भवनों पर भी सवाल
शिक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर भी डोटासरा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3700 से अधिक स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं और करीब 83 हजार कक्षा-कक्षों की आवश्यकता है, लेकिन इसके बावजूद सरकार कोई स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं कर पाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत की फटकार के बावजूद भी सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है, जिससे छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
‘पर्ची सरकार’ पर साधा निशाना
डोटासरा ने सरकार पर तंज कसते हुए उसे ‘पर्ची सरकार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर नामांकन बढ़ाने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर सरकार स्कूलों के मर्जर और बंद करने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने शिक्षा मंत्री पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सत्र के बीच ट्रांसफर करने में तो सरकार सक्रिय है, लेकिन शिक्षा सुधार के मुद्दों पर पूरी तरह निष्क्रिय बनी हुई है।
शिक्षा बना सियासी मुद्दा
राजस्थान में शिक्षा को लेकर उठे इस विवाद ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है, तो वहीं सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसका सीधा संबंध लाखों छात्रों और हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन