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राजस्थान के भिवाड़ी धमाके के बाद सुलगते सवाल,हादसे ने सिस्टम की खोली पोल

राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को हुए भीषण धमाके ने प्रशासनिक निगरानी और औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट नंबर G-1, 118 स्थित एक बंद बताई जा रही फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। 

Mon, 16 Feb 2026 05:55 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के भिवाड़ी धमाके के बाद सुलगते सवाल,हादसे ने सिस्टम की खोली पोल

राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को हुए भीषण धमाके ने प्रशासनिक निगरानी और औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुशखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया के प्लॉट नंबर G-1, 118 स्थित एक बंद बताई जा रही फैक्ट्री में अवैध रूप से पटाखों का निर्माण किया जा रहा था। दोपहर 1 बजे तक इस हादसे में 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि दो अन्य के अंदर फंसे होने की आशंका के बीच सर्च ऑपरेशन जारी है।

बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था बारूद का खेल

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री मालिक ने परिसर किराए पर दे रखा था। किरायेदार वहां बिना लाइसेंस और सरकारी अनुमति के पटाखे बनाने का काम कर रहा था। परिसर में बारूद और गत्ते का भारी स्टॉक जमा था, जिससे आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते कई धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक 3 से 4 जोरदार धमाकों की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई।

हादसे के बाद आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे कर्मचारी घबराकर बाहर निकल आए। एहतियातन नजदीकी इकाइयों को खाली कराया गया और बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी गई। आधा दर्जन से अधिक दमकल गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, हालांकि आग बुझाने का काम लंबे समय तक जारी रहा।

सुबह धुआं उठा, फिर मचा कोहराम

दमकल प्रभारी राजू खान के अनुसार सुबह करीब 10 बजे फैक्ट्री के अंदर से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया और धमाकों का सिलसिला शुरू हो गया। गश्त कर रही पुलिस टीम ने सबसे पहले आग देखी और तुरंत दमकल को सूचना दी।

अलवर की एडीएम सुमित्रा मिश्र ने बताया कि अब तक 7 शव निकाले जा चुके हैं। मृतक मजदूर उत्तर प्रदेश और बिहार के बताए जा रहे हैं। दो अन्य मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है।

बंद फैक्ट्री में कैसे चल रहा था अवैध काम?

स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित फैक्ट्री पिछले कई महीनों से बंद बताई जा रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि बंद परिसर के भीतर बारूद का भंडारण और पटाखों का निर्माण कैसे चल रहा था और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? औद्योगिक क्षेत्र में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा जांच की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।

घटना के बाद जब अलवर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर मौके पर पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और निगरानी की जाती तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।

“जिम्मेदारों पर होगी सख्त कार्रवाई”

जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने कहा, “घटना बेहद गंभीर है। फैक्ट्री मालिक और मैनेजर को मौके पर बुलाया गया है। पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।” प्रशासन ने फैक्ट्री परिसर को सील कर दिया है और विस्फोटक सामग्री की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है।

लाइसेंस अनिवार्य, सजा का कड़ा प्रावधान

नियमों के अनुसार पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री के लिए अलग-अलग लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, फायर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना पड़ता है। बिना लाइसेंस पटाखा फैक्ट्री चलाना गैरकानूनी है, जिसमें भारी जुर्माना, फैक्ट्री सील, गिरफ्तारी और जेल तक की सजा का प्रावधान है।

भिवाड़ी का यह हादसा न केवल औद्योगिक सुरक्षा मानकों की पोल खोलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासनिक निगरानी में कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है। अब देखना होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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