आपके गुलाम नहीं... मंत्री है, राजस्थान विधानसभा में मंत्री की तल्ख टिप्पणी से मचा हंगामा
राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को पशु बीमा योजना को लेकर हुई चर्चा के दौरान सदन का माहौल अचानक गरमा गया। लक्ष्य और उसकी प्रगति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। तीखे सवाल जवाब और आपत्तियों के बीच कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को पशु बीमा योजना को लेकर हुई चर्चा के दौरान सदन का माहौल अचानक गरमा गया। लक्ष्य और उसकी प्रगति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए। तीखे सवाल जवाब और आपत्तियों के बीच कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई, जिसके बाद अध्यक्ष को हस्तक्षेप करते हुए अगला प्रश्न लेना पड़ा।
दरअसल प्रश्नकाल के दौरान पशु बीमा योजना से जुड़े सवाल पर चर्चा चल रही थी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूरक प्रश्न पूछते हुए सरकार से तय लक्ष्य की प्रगति पर स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने मार्च तक 42 लाख पशुओं का बीमा करने का लक्ष्य घोषित किया है, जबकि अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने में केवल एक महीना शेष है। ऐसे में इतने कम समय में लाखों पशुओं का बीमा कैसे किया जाएगा, यह स्पष्ट किया जाए।
जूली ने ऊंची आवाज में कहा कि सरकार को सदन के सामने यह बताना चाहिए कि लक्ष्य प्राप्ति की ठोस कार्ययोजना क्या है। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताना आसान है, लेकिन जमीन पर काम होना जरूरी है। यदि समय सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा नहीं होता तो यह केवल घोषणा बनकर रह जाएगा। उनके सवालों के दौरान विपक्षी विधायकों ने भी मेज थपथपाकर समर्थन किया।
इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री और सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के बोलने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रश्न पूछते समय मर्यादा और विनम्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए। गर्ग ने कहा कि यह विधानसभा है और मंत्री किसी के गुलाम नहीं हैं, इसलिए तमीज से बात करनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में शोर बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
स्थिति को बिगड़ता देख अध्यक्ष ने सदन को शांत रहने की नसीहत दी और अगला प्रश्न लेने की घोषणा कर दी। हालांकि इस मुद्दे को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी रहा।
इससे पहले पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने योजना पर सरकार का पक्ष रखते हुए विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2023 24 में मुख्यमंत्री कामधेनु बीमा योजना शुरू की थी। योजना के तहत दो दुधारू पशुओं का बीमा करने की घोषणा की गई थी। उस समय महंगाई राहत शिविरों के माध्यम से लगभग एक करोड़ दस लाख पशुपालकों से आवेदन लिए गए थे।
मंत्री के अनुसार बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होने के बावजूद केवल 1764 पशुओं का ही बीमा किया जा सका। उन्होंने यह भी कहा कि 23 बीमा दावों के आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन किसी को भुगतान नहीं किया गया। कुमावत ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने योजना का व्यापक प्रचार तो किया, लेकिन क्रियान्वयन में गंभीरता नहीं दिखाई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के गठन के बाद लंबित मामलों की समीक्षा की गई और अब तक 7 लाख 33 हजार रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मंत्री ने दावा किया कि सरकार 42 लाख पशुओं के बीमा के लक्ष्य को लेकर गंभीर है और चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि समय सीमा के भीतर अधिक से अधिक पशुपालकों को योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
पशु बीमा योजना को लेकर हुई इस बहस ने सदन में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। विपक्ष जहां लक्ष्य और क्रियान्वयन को लेकर सरकार को घेरता नजर आया, वहीं सत्ता पक्ष ने पिछली सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। चर्चा के दौरान तीखे शब्दों का प्रयोग और आपसी टकराव ने यह संकेत दिया कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
कुल मिलाकर पशु बीमा योजना पर हुई बहस ने यह स्पष्ट कर दिया कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों से जुड़े मुद्दे विधानसभा में प्रमुखता से उठ रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार निर्धारित लक्ष्य को किस तरह हासिल करती है और विपक्ष इस पर कितना दबाव बनाए रखता है।
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