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पंचायत–निकाय चुनाव से क्यों डर रही सरकार ? जोधपुर–बाड़मेर दौरे पर सचिन पायलट ने साधा निशाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने राजस्थान में प्रशासनिक फैसलों, पंचायत–निकाय चुनाव, बेरोजगारी और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

Wed, 14 Jan 2026 03:10 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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पंचायत–निकाय चुनाव से क्यों डर रही सरकार ? जोधपुर–बाड़मेर दौरे पर सचिन पायलट ने साधा निशाना

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने राजस्थान में प्रशासनिक फैसलों, पंचायत–निकाय चुनाव, बेरोजगारी और केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को जोधपुर पहुंचे पायलट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य में सरकार के भीतर सत्ता के कई केंद्र बन गए हैं और निर्वाचित सरकार फैसले लेने के बजाय बार-बार दिल्ली की ओर देख रही है। जोधपुर से सड़क मार्ग के जरिए वे बाड़मेर के लिए रवाना हुए।

पायलट ने पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार चुनाव कराने से बचना चाहती है, क्योंकि उसे पता है कि जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव टालने के लिए सरकार लगातार बहाने खोज रही है। पायलट ने कहा, “सरकार जान चुकी है कि चुनाव हुए तो जनता अपनी भड़ास निकालेगी। इसलिए कभी परिसीमन तो कभी अन्य कारणों का हवाला देकर चुनावों को टाला जा रहा है।”

उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज स्थिति यह है कि सरकार में सत्ता के कई केंद्र हो गए हैं। रोज चर्चा रहती है कि मंत्रीमंडल का पुनर्गठन कब होगा और सरकार में बदलाव कब आएगा। “लोगों ने यहां की सरकार को चुना था, फिर हर फैसले के लिए दिल्ली की तरफ क्यों देखा जा रहा है?” पायलट ने यह सवाल उठाया।

जिले की सीमाएं जनता की सहमति से तय हों

बाड़मेर और बालोतरा जिले की सीमाओं में प्रस्तावित बदलाव पर पायलट ने कहा कि कुछ जिलों की सीमाओं में जो परिवर्तन किए जा रहे हैं, वे प्रशासनिक जरूरत से ज्यादा राजनीतिक लाभ से प्रेरित नजर आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना जनता की राय लिए सीमाओं में तोड़फोड़ की जा रही है, जिससे आम लोगों में भ्रम और असंतोष बढ़ रहा है।

पायलट ने कहा कि सीमांकन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी द्वारा इस मुद्दे पर किए जा रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता की भावनाओं के साथ खड़ी है और जिले की सीमाओं में बदलाव जनता की सहमति से ही होना चाहिए।

रोजगार और आर्थिक असमानता पर सरकार को घेरा

रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए पायलट ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में सौ दिन का रोजगार सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए थे। मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि देश में अमीर और अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और गरीब हो रहा है। यह बढ़ती खाई गलत आर्थिक नीतियों का परिणाम है।

उन्होंने बेरोजगारी को देश का सबसे बड़ा संकट बताते हुए कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही। पायलट ने आरोप लगाया कि मनरेगा को कमजोर करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, बजट में कटौती की जा रही है और पहले जो निर्णय गांव के स्तर पर होते थे, अब उन्हें राजधानी से थोपने की कोशिश की जा रही है।

केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

बीजेपी पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए पायलट ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विपक्षी नेताओं को डराने, दबाने और बदनाम करने के लिए ईडी की कार्रवाई की जा रही है।

पायलट ने यह भी दावा किया कि ईडी के मामलों में सजा की दर महज एक फीसदी है, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली और मंशा पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

अपने बयान के अंत में पायलट ने कहा कि कांग्रेस इन तमाम मुद्दों को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी और जनता के अधिकारों की लड़ाई लगातार जारी रखेगी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जनता सरकार की नीतियों का जवाब देगी।

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