पाकिस्तान को पीठ दिखाकर भागना पड़ा था; बीकानेर से अमित शाह ने याद दिलाया सीमा का इतिहास
बीकानेर की तपती रेत, 42 डिग्री तापमान, सरहद पर सन्नाटा और सामने पाकिस्तान की सीमा… इसी माहौल के बीच मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उस पोस्ट पर पहुंचे, जिसका नाम भारत-पाक सीमा के इतिहास में खास जगह रखता है— सांचू पोस्ट।

बीकानेर की तपती रेत, 42 डिग्री तापमान, सरहद पर सन्नाटा और सामने पाकिस्तान की सीमा… इसी माहौल के बीच मंगलवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उस पोस्ट पर पहुंचे, जिसका नाम भारत-पाक सीमा के इतिहास में खास जगह रखता है— सांचू पोस्ट। यह सिर्फ एक दौरा नहीं था, बल्कि सीमा सुरक्षा के नए दौर और पुराने सैन्य गौरव का संदेश भी माना गया।
सुबह करीब 11 बजे हेलिकॉप्टर से सांचू पोस्ट पहुंचे अमित शाह के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे। सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने उनका स्वागत किया। यहां शाह ने जवानों के साथ समय बिताया, सीमा की गतिविधियों की जानकारी ली और पारंपरिक नाश्ता भी किया।
ऐतिहासिक पोस्ट से जुड़ी पुरानी कहानी, जिसे शाह ने फिर दोहराया
प्रहरी सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि उनके मन में सांचू चौकी को देखने की इच्छा गृहमंत्री बनने से पहले से थी। उन्होंने बताया कि 1964 के भारत-पाक संघर्ष के दौरान यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद अहम था।
शाह ने उस घटना का जिक्र किया जब सूचना मिली थी कि पाकिस्तान ने सांचू पर कब्जा करने की शुरुआत की थी। उस समय 3 RAC और 13 ग्रेनेडियर के जवानों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस पोस्ट को भारत के नियंत्रण में बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि जवानों के साहस के कारण पाकिस्तान को यहां से “पीठ दिखाकर भागना पड़ा था।” शाह के इस बयान के बाद सम्मेलन में मौजूद जवानों का उत्साह भी देखने लायक रहा।
अब सरहद पर सिर्फ जवान नहीं, तकनीक भी संभालेगी मोर्चा
दौरे का सबसे बड़ा संदेश सीमा सुरक्षा के नए मॉडल को लेकर आया। अमित शाह ने साफ कहा कि आने वाले 6 महीनों में सरकार ड्रोन रोधी संयंत्र (Anti-Drone System) लगाने की शुरुआत करेगी।
उन्होंने कहा कि सिर्फ ड्रोन को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि सीमा पार से आने वाले ड्रोन को जमीन पर कौन रिसीव करता है और उसके जरिए पहुंचे सामान का उपयोग कौन करता है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों पर सरकार की पैनी नजर रहेगी और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ड्रोन, हथियार और नारकोटिक्स… नई चुनौती पर फोकस
अमित शाह ने कहा कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नारकोटिक्स की तस्करी सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रही है। ऐसे मामलों को कठोरता से रोकने के लिए नई रणनीति तैयार की जा रही है।
उन्होंने सीमा से जुड़े गांवों और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी जोर दिया। शाह ने कहा कि सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में अगर कोई संदिग्ध या अवैध निर्माण हो तो उसकी सूचना तत्काल कलेक्टर और एसपी को दी जानी चाहिए। उन्होंने जनसंख्या परिवर्तन जैसे मामलों पर भी सतर्क रहने की बात कही।
1096 किलोमीटर सड़क, नई फेंसिंग और पानी की व्यवस्था
शाह ने बताया कि राजस्थान के रेगिस्तानी बॉर्डर क्षेत्र में 1096 किलोमीटर लंबी लेटरल रोड और 520 किलोमीटर लंबी एक्सील रोड तैयार की जा रही है, जिससे बीएसएफ की आवाजाही और ऑपरेशन क्षमता मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि नई डिजाइन की फेंसिंग लगाने का काम भी चल रहा है। साथ ही राजस्थान की 180 बॉर्डर चौकियों तक पाइपलाइन के जरिए पेयजल पहुंचाने का काम पूरा किया जा चुका है।
डेढ़ घंटे का दौरा, लेकिन कई बड़े संकेत
करीब डेढ़ घंटे तक सांचू पोस्ट पर रहे अमित शाह ने दूरबीन से पाकिस्तान सीमा और जीरो पॉइंट क्षेत्र का भी अवलोकन किया। उन्होंने जवानों से बातचीत की और हाल के अभियानों में उनके प्रदर्शन की सराहना की।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि बीएसएफ के जवानों ने हमेशा की तरह चुनौतीपूर्ण हालात में मोर्चा संभाला और जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया।
रेगिस्तान की इस ऐतिहासिक चौकी से शाह का संदेश साफ था— अब सीमा सुरक्षा सिर्फ चौकियों और जवानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक, निगरानी और तेज इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ नया सुरक्षा तंत्र तैयार किया जाएगा।
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