जयपुर के चर्चित अमायरा केस में हाईकोर्ट ने रोका CBSE का एक्शन
शहर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 23 फरवरी को जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।

शहर के चर्चित नीरजा मोदी स्कूल में छात्रा अमायरा की मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस संवेदनशील प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 23 फरवरी को जारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने जहां एक ओर स्कूल को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर सख्त शर्तों के साथ जवाबदेही भी तय की है।
CBSE के आदेश पर फिलहाल ब्रेक
दरअसल, CBSE ने 23 फरवरी को कार्रवाई करते हुए स्कूल की कक्षा 11 और 12 की संबद्धता को दो वर्षों के लिए स्थगित कर दिया था। यह फैसला छात्रा अमायरा की मौत के बाद सामने आई कथित कमियों और सुरक्षा मानकों में खामियों के आधार पर लिया गया था। लेकिन अब हाईकोर्ट ने इस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिससे फिलहाल स्कूल को बड़ी राहत मिली है।
हाईकोर्ट की सख्त शर्तें
जस्टिस गणेश मीना की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्कूल प्रबंधन के सामने कई स्पष्ट शर्तें रखी हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि स्कूल 10 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये की राशि जमा कराए। यह राशि एक तरह से जवाबदेही और सुधार के प्रति गंभीरता का संकेत मानी जा रही है।
इसके साथ ही कोर्ट ने CBSE द्वारा बताई गई सभी कमियों को एक माह के भीतर दुरुस्त करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने साफ किया कि यह राहत स्थायी नहीं है, बल्कि सुधार की शर्तों पर आधारित है।
CBSE को भी सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि CBSE को भी जिम्मेदारी से काम करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बोर्ड से कहा है कि 45 दिनों के बाद स्कूल का दोबारा निरीक्षण किया जाए। यदि उस दौरान कोई कमी पाई जाती है, तो बोर्ड अदालत में स्कूल के खिलाफ प्रार्थना पत्र पेश कर सकता है।
यह निर्देश स्पष्ट करता है कि अदालत इस मामले में सतत निगरानी चाहती है और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्टूडेंट्स के भविष्य पर भी फोकस
मामले का एक अहम पहलू छात्रों का भविष्य भी है। अदालत ने CBSE को निर्देश दिया है कि वह उन स्कूलों की सूची पेश करे, जहां नीरजा मोदी स्कूल के छात्रों को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि छात्रों की पढ़ाई किसी भी हाल में प्रभावित न हो।
स्कूल की दलील और कोर्ट का संतुलन
नीरजा मोदी स्कूल प्रबंधन ने अपनी याचिका में CBSE के आदेश को कठोर बताते हुए राहत की मांग की थी। स्कूल का कहना था कि आदेश से सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए संतुलित रुख अपनाया—एक ओर स्कूल को राहत दी, तो दूसरी ओर कड़े सुधारात्मक निर्देश भी दिए।
मामले की गंभीरता बरकरार
अमायरा की मौत का मामला अभी भी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। हाईकोर्ट के इस आदेश से यह स्पष्ट है कि न्यायालय न केवल घटना की गंभीरता को समझ रहा है, बल्कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी और छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख में है।
फिलहाल इस फैसले ने स्कूल को राहत जरूर दी है, लेकिन आने वाले 45 दिन यह तय करेंगे कि नीरजा मोदी स्कूल अपनी कमियों को दूर कर पाता है या नहीं।
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