5 राज्यों की जीत के सूत्रधार बने डॉ सतीश पूनिया; अब राज्यसभा में होगी नई पारी
पूनिया भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के संकटमोचक बनकर उभरे हैं। उनके प्रभारी रहते भाजपा ने हरियाणा (2024) में ऐतिहासिक हैट्रिक लगाई और यूपी (2022) के अलीगढ़ में सभी 7 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया।

राजस्थान भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को पार्टी हाईकमान ने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह घोषणा उस समय हुई जब पूनिया जयपुर के आदर्श नगर स्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक साधारण कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच छठी पंक्ति में चुपचाप बैठे हुए थे। बिना किसी तामझाम और वीआईपी संस्कृति के, एक वरिष्ठ नेता का इस तरह सामान्य कार्यकर्ता की भांति बैठना उनकी उसी सादगी को बयां करता है, जिसने आज उन्हें राजनीति के शीर्ष पायदान पर ला खड़ा किया है।
पार्टी के भीतर और बाहर डॉ. सतीश पूनिया की पहचान एक पद-लोलुप नेता की नहीं, बल्कि संगठन के लिए दिन-रात पसीना बहाने वाले एक समर्पित सिपाही की रही है। भले ही वे राजस्थान विधानसभा चुनाव में दोबारा विधायक बनने से चूक गए हों, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की नजर में उनकी सांगठनिक क्षमता और चुनावी बिसात बिछाने की कला का कोई सानी नहीं है। यही कारण है कि हाईकमान ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें उच्च सदन भेजने का फैसला किया है।
चुनावी रणभूमि के 'संकटमोचक': कई राज्यों में लहराया जीत का परचम
सतीश पूनिया केवल राजस्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के एक कुशल रणनीतिकार के रूप में उभरे हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने जब भी उन्हें किसी राज्य में कमान सौंपी, उन्होंने अपनी सांगठनिक कुशलता से पार्टी की झोली में जीत डालने का काम किया:
• हरियाणा में ऐतिहासिक हैट्रिक (2024): केंद्रीय नेतृत्व ने डॉ. पूनिया को 2024 में हरियाणा भाजपा का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया था। विरोधी लहर और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पूनिया की सटीक चुनावी रणनीति के दम पर भाजपा ने हरियाणा में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई।
• दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव (2025): डूसू (DUSU) चुनाव 2025 में ABVP के प्रत्याशी आर्यन मान को अध्यक्ष पद पर भारी मतों से जिताने में पूनिया की भूमिका बैकस्टेज हीरो जैसी रही। भाजपा के बड़े जाट चेहरों में शुमार होने के कारण उन्होंने दिल्ली के कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र गुटों और प्रवासी युवाओं के साथ बेहतरीन तालमेल बिठाया, जिससे जाट और किसान बेल्ट का वोट एकतरफा ABVP के पक्ष में आ गया।
• उत्तर प्रदेश में क्लीन स्वीप (2022): यूपी चुनाव में उन्हें अलीगढ़ संभाग (अलीगढ़, हाथरस, कासगंज और एटा) का चुनाव प्रभारी बनाया गया था। उनकी माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति का नतीजा यह रहा कि अलीगढ़ जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया।
• बिहार का चुनौतीपूर्ण सीमांचल (2020): जब वे राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष थे, तब उन्हें बिहार के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र सीमांचल (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया) और मिथिलांचल की जिम्मेदारी मिली। वहां उन्होंने धुआंधार रैलियां और रोड शो कर एनडीए के पक्ष में माहौल बदला।
• पश्चिम बंगाल (2026): चुनावी रणनीतियों और सांगठनिक मजबूती में उनके शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए बीजेपी आलाकमान ने हाल ही में उन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भी स्थानीय नेताओं के बीच समन्वय और संगठन को धार देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।
सादगी और जमीन से जुड़ाव ही पूनिया की असली ताकत
डॉ. सतीश पूनिया का कद भले ही आज बहुत बड़ा हो चुका हो, लेकिन उनका दिल हमेशा एक जमीनी कार्यकर्ता की तरह ही धड़कता है। पश्चिमी राजस्थान के दौरों के दौरान ऊंट गाड़ी पर सवारी कर पशुपालकों और किसानों की समस्याओं को सीधे सुनना हो, या किसी दलित परिवार के घर जमीन पर बैठकर भोजन करना—उनकी इन तस्वीरों और वीडियो ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं।
“बिना किसी स्वार्थ, मांग या महत्वाकांक्षा के लगातार संगठन के लिए काम करते रहने का इनाम डॉ. पूनिया को समय-समय पर मिलता रहा है। पहले वे प्रदेशाध्यक्ष बने, फिर विधायक और अब पार्टी उन्हें देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी राज्यसभा में भेजने जा रही है।”
पार्टी के गलियारों में चर्चा है कि पूनिया का यह मनोनयन देश भर के उन लाखों कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा संदेश है, जो बिना किसी पद की लालसा के पीछे की पंक्ति में बैठकर ईमानदारी से काम करते हैं। हाईकमान ने यह साबित कर दिया है कि भाजपा में पीछे की पंक्ति में बैठा कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत के दम पर सबसे आगे की पंक्ति में आ सकता है।
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