ट्रेंकुलाइज के 20 दिन बाद ही फरार हुआ चीता; MP से चंबल पार कर पहुंचा राजस्थान
जंगल का ये मेहमान अब राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच जैसे अपना रास्ता तय कर चुका है। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-2 एक बार फिर चंबल नदी पार कर राजस्थान की सीमा में दाखिल हो गया।

जंगल का ये मेहमान अब राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच जैसे अपना रास्ता तय कर चुका है। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-2 एक बार फिर चंबल नदी पार कर राजस्थान की सीमा में दाखिल हो गया। गुरुवार सुबह कोटा जिले के पालीघाट क्षेत्र के अजीतपुरा गांव में जब लोग नींद से जाग रहे थे, तब गांव की सड़कों पर एक चीता आराम से टहलता नजर आया।
गांववालों के लिए ये नजारा हैरान करने वाला था—सड़क पर बिना किसी जल्दबाजी के घूमता चीता, जैसे किसी शहरी इलाके का निरीक्षण कर रहा हो। कुछ देर बाद वह खेतों की ओर निकल गया और फिर नजरों से ओझल हो गया।
सुबह 5 बजे से हाई अलर्ट पर वन विभाग
चीते के गांव में आने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं। सुबह करीब 5 बजे से ही पालीघाट और फलौदी रेंज की टीमें मौके पर पहुंचकर उसकी मॉनिटरिंग में जुट गईं।
रणथम्भौर क्षेत्र के अधिकारियों ने तुरंत रणथम्भौर टाइगर रिजर्व प्रशासन को अलर्ट किया और साथ ही कूनो नेशनल पार्क की टीम को भी सूचना दी।
कूनो से विशेष टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है और GPS व अन्य तकनीकों की मदद से चीते की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश जारी है। फिलहाल चीता खेतों और झाड़ियों के बीच मूवमेंट करता हुआ देखा जा रहा है।
रात के अंधेरे में ‘सीमा पार’ का खेल
जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात यह चीता चंबल नदी पार कर पहले कोटा जिले की सीमा में आया। लेकिन यहीं नहीं रुका—रात के अंधेरे में उसने फिर से चंबल पार की और सवाई माधोपुर जिले की तरफ बढ़ गया।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह मूवमेंट चीते के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा है, जहां वह नए इलाकों की तलाश में लंबी दूरी तय करता है। लेकिन बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों में आना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
20 दिन पहले ही पकड़कर ले गई थी टीम
यह वही चीता KP-2 है, जिसे 27 मार्च को कोटा जिले के पीपल्दा समेल गांव में ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया था। उस समय भी यह आबादी वाले इलाके में पहुंच गया था, जिसके बाद कूनो नेशनल पार्क की टीम इसे वापस ले गई थी।
लेकिन महज 20 दिन के भीतर ही इसने फिर वही रास्ता पकड़ लिया और राजस्थान लौट आया। इससे वन्यजीव विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि आखिर यह चीता बार-बार इसी इलाके की ओर क्यों आकर्षित हो रहा है।
ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन की अपील
अजीतपुरा गांव में चीते की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का माहौल है। हालांकि वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घरों से बाहर न निकलें और किसी भी तरह की हरकत से बचें जिससे जानवर उकस सकता है।
टीमें लगातार लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सतर्क कर रही हैं और चीते को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर मोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
एक और चीता भी एक्टिव, बढ़ी चिंता
इधर KP-2 के अलावा KP-3 नाम का एक और चीता भी बारां जिले में लगातार एक्टिव है। हाल ही में उसकी लोकेशन अटरू और छबड़ा इलाके में ट्रेस की गई थी। इससे वन विभाग की चुनौती और बढ़ गई है, क्योंकि एक से ज्यादा चीतों की मूवमेंट आबादी वाले इलाकों के पास दर्ज हो रही है।
पहले भी ‘लंबी यात्रा’ कर चुकी है मादा चीता ‘ज्वाला’
यह पहला मौका नहीं है जब कूनो से निकला कोई चीता इतनी लंबी दूरी तय कर राजस्थान पहुंचा हो। करीब 8 महीने पहले मादा चीता ‘ज्वाला’ भी 130 किलोमीटर का सफर तय कर सवाई माधोपुर जिले के बालेर गांव पहुंच गई थी, जहां उसने एक बाड़े में बकरी का शिकार कर लिया था।
क्या बन रही है नई ‘रूट मैप’ कहानी?
बार-बार चीतों का कूनो से निकलकर राजस्थान की ओर आना अब एक नई कहानी की तरफ इशारा कर रहा है। क्या ये इलाका उनके लिए नया कॉरिडोर बनता जा रहा है? या फिर यह सिर्फ भटकाव है?
फिलहाल जवाब खोजे जा रहे हैं, लेकिन इतना तय है जंगल का ये ‘भटका बादशाह’ अभी शांत बैठने वाला नहीं है।
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