आश्रम के भीतर मौत का रहस्य! प्रेम बाईसा केस में एंट्री बैन, वायरिंग हुई पर CCTV क्यों नहीं लगे?
जोधपुर के पाल रोड स्थित आरती नगर आश्रम के भारी-भरकम गेट अब बंद हैं। बाहर खाकी पहरा है, भीतर सन्नाटा। जिस आश्रम में कभी प्रवचन, भजन और संतों की चहल-पहल रहती थी, वहां बीते तीन दिनों से खामोशी पसरी हुई है।

जोधपुर के पाल रोड स्थित आरती नगर आश्रम के भारी-भरकम गेट अब बंद हैं। बाहर खाकी पहरा है, भीतर सन्नाटा। जिस आश्रम में कभी प्रवचन, भजन और संतों की चहल-पहल रहती थी, वहां बीते तीन दिनों से खामोशी पसरी हुई है। वजह—राजस्थान की चर्चित आध्यात्मिक हस्ती साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत।
मौत के बाद हालात ऐसे बदले कि आश्रम के भीतर किसी भी व्यक्ति की एंट्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है। तीन मंजिला इस विशाल परिसर पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले पर सवाल हैं और हर कोने में सस्पेंस।
उसी आश्रम से अस्पताल तक… और फिर मौत
यही वह आश्रम है, जहां बुधवार शाम प्रेम बाईसा की अचानक तबीयत बिगड़ी थी। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पहली नजर में यह एक सामान्य स्वास्थ्य बिगड़ने का मामला लग सकता था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई सवालों ने सिर उठाना शुरू कर दिया।
घटना के तुरंत बाद आश्रम को बंद कर दिया गया। अंदर क्या हुआ, कौन मौजूद था, और किन हालात में साध्वी की तबीयत बिगड़ी—इन तमाम सवालों के जवाब अब पुलिस तलाश रही है।
एक साल पुराना आश्रम, बड़ी पहचान
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह आश्रम करीब एक साल पहले ही बनकर तैयार हुआ था। उद्घाटन के वक्त इसे लेकर काफी चर्चा रही थी। योग गुरु बाबा रामदेव, शंकराचार्य सहित संत समाज के कई बड़े चेहरे यहां पहुंचे थे। आश्रम को आध्यात्मिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बताया जा रहा था।
लेकिन अब यही आश्रम पुलिस जांच का केंद्र बन चुका है। जिस जगह को शांति और साधना का प्रतीक माना जाता था, वहीं अब मौत का रहस्य गहराता जा रहा है।
वायरिंग हुई… लेकिन CCTV कैमरे गायब!
जांच के दौरान सामने आया सबसे चौंकाने वाला तथ्य—आश्रम में CCTV कैमरों की पूरी वायरिंग की गई थी, लेकिन कैमरे कभी लगाए ही नहीं गए।
तीन मंजिला, आधुनिक सुविधाओं से लैस बताए जा रहे इस आश्रम में सुरक्षा के लिहाज से कैमरे होना सामान्य बात थी, लेकिन उनका न होना पुलिस के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
क्या कैमरे लगाए ही नहीं गए?
या फिर किसी वजह से जानबूझकर उन्हें सक्रिय नहीं किया गया?
और अगर कैमरे होते, तो क्या उस शाम की पूरी कहानी सामने आ जाती?
पुलिस इस एंगल को बेहद गंभीरता से देख रही है। CCTV का न होना जांच में एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
साक्ष्य मिले, लेकिन जुबानें खामोश
पुलिस ने शुरुआती जांच के दौरान आश्रम परिसर से कई अहम साक्ष्य जुटाने का दावा किया है। हालांकि, सुरक्षा कारणों और जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए इन साक्ष्यों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है।
आश्रम से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन अब तक किसी को भी भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। हर बयान को क्रॉस-चेक किया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि जल्दबाजी में किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं होगा।
हर पहलू से जांच, हर एंगल पर नजर
क्या यह सिर्फ स्वास्थ्य बिगड़ने से हुई मौत थी?
क्या किसी तरह की लापरवाही हुई?
या फिर आश्रम की चारदीवारी के भीतर कोई ऐसा राज छिपा है, जो अब सामने आने वाला है?
इन तमाम सवालों के बीच पुलिस हर एंगल से जांच आगे बढ़ा रही है—मेडिकल रिपोर्ट, विसरा जांच, आश्रम की गतिविधियां, वहां मौजूद लोगों की भूमिका और सुरक्षा इंतजाम।
फिलहाल इतना तय है कि प्रेम बाईसा की मौत सिर्फ एक साधारण घटना नहीं रह गई है। आश्रम की बंद दीवारों के पीछे छिपा सच धीरे-धीरे सामने लाने की कोशिश जारी है।
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