कौन हैं पंजाब के रिटायर IAS अधिकारी वीके जंजुआ, केंद्र ने दी मुकदमा चलाने की मंजूरी
यह आदेश एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान पेश किया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने प्रक्रिया में देरी को लेकर दायर किया था।

पंजाब कैडर के 1989 बैच के रिटायर आईएएस (IAS) अधिकारी और पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव विजय कुमार जंजुआ की मुश्किलें बढ़ गई हैं। केंद्र सरकार ने 16 साल पुराने एक कथित भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। यह मामला साल 2009 का है जब वी.के. जंजुआ उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में निदेशक-सह-सचिव के पद पर तैनात थे। विजिलेंस ब्यूरो ने 9 नवंबर 2009 को जाल बिछाकर उन्हें कथित तौर पर 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया था।
शिकायतकर्ता तुलसी राम मिश्रा के अनुसार, उन्होंने अपने प्लॉट के बगल वाली खाली जमीन के आवंटन के लिए आवेदन किया था, जिसे शुरू में तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया था। आरोप है कि जंजुआ ने इस काम को करवाने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। इसी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस मामले ने तब नया मोड़ लिया जब 2015 में मोहाली की एक विशेष अदालत ने जंजुआ को इस आपराधिक मामले से डिस्चार्ज (मुक्त) कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता तुलसी राम मिश्रा ने 2016 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था, "यह हैरान करने वाला है कि आपराधिक कार्यवाही का अधिकारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वे वित्तीय आयुक्त (राजस्व) तथा राज्य के मुख्य सचिव जैसे सर्वोच्च पदों तक पहुंच गए।"
पंजाब सरकार ने 5 सितंबर 2025 को केंद्र को अभियोजन की मंजूरी देने का प्रस्ताव भेजा था। अंततः, केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (DoPT) ने 11 फरवरी को जंजुआ के खिलाफ मुकदमा चलाने की औपचारिक अनुमति दे दी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अल्का सरीन की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान इस आदेश की प्रति प्रस्तुत की। यह आदेश एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान पेश किया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने प्रक्रिया में देरी को लेकर दायर किया था।
नवंबर 2009: विजिलेंस ब्यूरो द्वारा जंजुआ के आवास पर जाल बिछाया गया और 2 लाख रुपये की कथित बरामदगी हुई।
जनवरी 2015: विशेष अदालत, मोहाली ने जंजुआ को आरोपों से मुक्त किया।
2016: शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में डिस्चार्ज आदेश को चुनौती दी।
सितंबर 2023: हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को सभी दस्तावेज केंद्र को भेजने का निर्देश दिया।
सितंबर 2025: पंजाब सरकार ने केंद्र को औपचारिक प्रस्ताव भेजा।
फरवरी 2026: केंद्र सरकार ने मुकदमा चलाने की अंतिम मंजूरी दी।
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