DM सुसाइड केस पर सियासी संग्राम: केजरीवाल बोले- पंजाब ने कार्रवाई की, हरियाणा ने बचाया
पंजाब वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने पूर्व मंत्री भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह और पीए दिलबाग सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी और साजिश की धाराओं में मामला दर्ज किया था।

पंजाब वेयरहाउस कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या के मामले में पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह और पीए दिलबाग सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, धमकी और साजिश की धाराओं में मामला दर्ज किया था। वहीं, संसद में भी जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या का मामला गूंजा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि यदि पंजाब के सांसद गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या मामले में पत्र लिखते हैं, तो वह सीबीआई जांच का आदेश देंगे। यह मुद्दा लोकसभा में अमृतसर से कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने उठाया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि भुल्लर ने अधिकारी पर दबाव डाला, जिससे उसने सुसाइड कर लिया। उस समय सदन में बैठे केंद्रीय गृह मंत्री जाने ही वाले थे कि औजला ने उनसे उनकी बात सुनने की गुजारिश की। उसके बाद शाह ने जवाब दिया कि अगर पंजाब के सभी सांसद मिलकर उन्हें लिखकर रिक्वेस्ट देते हैं, तो वह तुरंत मामले की सीबीआई जांच का आदेश देंगे। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस मामले पर टिप्पणी की है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि हाल ही में पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के एक मंत्री पर गंभीर आरोप लगे। हमारी सरकार ने बिना किसी देरी या भेदभाव के उस मंत्री के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की और उसे न सिर्फ पद से हटाया, बल्कि गिरफ्तार भी करवाया।

वहीं, कुछ समय पहले हरियाणा में एक एडीजीपी ने आत्महत्या कर ली। कई लोगों पर गंभीर आरोप लगे, लेकिन उनकी पूरी पार्टी और सरकार दोषियों के समर्थन में उतर आई। यही फर्क है आम आदमी पार्टी और भाजपा में। जब बात इंसाफ की हो तो आम आदमी पार्टी अपनी ही सरकार के मंत्री पर भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती, जबकि भाजपा अपने लोगों को बचाने के लिए न्याय की ही बलि चढ़ा देती है।
भुल्लर बोले- खुद किया सरेंडर
अमृतसर के वेयर हाउसिंग डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या मामले में फंसे पंजाब के मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपने फेसबुक पेज पर दावा किया है कि वो कानून से भाग नहीं रहे हैं, उन्होंने खुद ही मंडी गोविंदगढ़ में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट पर लिखा- वाहेगुरु जी, मैंने अपना हर कदम ईश्वर की उपस्थिति के साथ उठाया है. मेरे लिए मेरे लोग ही मेरे ईश्वर हैं, उनके चेहरों में मैंने हमेशा ईश्वर का प्रतिबिंब देखा है। मेरे जीवन के हर निर्णय का उद्देश्य उनकी अच्छाई और सत्य के मार्ग पर चलना रहा है। उन्होंने लिखा कि लेकिन आज जो अफवाहें फैल रही हैं कि मैं भाग गया हूं, यह सच नहीं है? मैं कभी सत्य से नहीं भागूंगा। मुझे देश के कानून पर पूरा भरोसा है और न्याय व्यवस्था पर भी अटूट विश्वास है। मैं कहीं भागा नहीं हूं, मैं अपने पंजाब में हूं। सत्य और न्याय में विश्वास रखते हुए मैं स्वयं मंडी गोबिंदगढ़ में सरेंडर कर रहा हूं।
सीएम भगवंत मान बोले, कानून सबके लिए समान
सीएम भगवंत मान ने कहा कि मेरे लिए, पूरा पंजाब एक परिवार है। अगर पंजाब में कोई भी कानून तोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर हो, या मेरा रिश्तेदार हो, या कोई प्रभावशाली व्यक्ति हो। किसी को भी बचाना हमारी पार्टी का एजेंडा नहीं है। नकद लेन-देन और किसी को भी अनुचित लाभ पहुंचाने पर सख्त रोक है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यदि किसी ने गलत किया है या किसी को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होगी। मंत्री हो या आम व्यक्ति, कानून सबके लिए समान है। मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
बठिंडा सांसद हरसिमरत ने लिखा गृहमंत्री को पत्र
बठिंडा से अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग उठाई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मामले को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया। हरसिमरत बादल ने आरोप लगाया कि डॉ रंधावा ने पहले ही मानसिक दबाव और प्रताड़ना की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी थी, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में परिवहन मंत्री ललजीत सिंह भुल्लर, उनके पिता और एक सहयोगी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि आरोप है कि अधिकारी पर टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर मंत्री के पिता के पक्ष में निर्णय लेने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, अपमान और धमकियां दी गईं। यहां तक कि उन्हें डराने के लिए आपराधिक तत्वों का सहारा लेने के आरोप भी सामने आए हैं। मामले की गंभीरता और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को देखते हुए जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना है कि केवल केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा ही निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सकती है और इससे पीड़ित परिवार तथा आम जनता का विश्वास बहाल होगा।
रिपोर्ट: मोनी देवी
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