Congress Fractures Amidst AAP Wave Channi and Warring Clash in Front of Rahul and Kharge Bajwa Storms Out of Meeting AAP की लहर में बिखरी कांग्रेस, राहुल-खरगे के सामने भिड़े चन्नी और वारिंग; बैठक छोड़ निकले बाजवा, Punjab Hindi News - Hindustan
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AAP की लहर में बिखरी कांग्रेस, राहुल-खरगे के सामने भिड़े चन्नी और वारिंग; बैठक छोड़ निकले बाजवा

इस आंतरिक विवाद की मुख्य वजह पार्टी के दिग्गज नेताओं का चुनाव में प्रदर्शन रहा। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को उनके अपने ही गढ़ गिद्दरबाहा में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है।

Sun, 31 May 2026 06:11 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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AAP की लहर में बिखरी कांग्रेस, राहुल-खरगे के सामने भिड़े चन्नी और वारिंग; बैठक छोड़ निकले बाजवा

पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने कांग्रेस के लिए सिर्फ सीटों का नुकसान नहीं कराया है, बल्कि पार्टी के भीतर की गुटबाजी और कलह को भी चौराहे पर ला खड़ा किया है। एक ओर राज्य की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) ने शहरी इलाकों में एकतरफा लहर पर सवार होकर प्रचंड जीत दर्ज की है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आंतरिक अंतर्विरोधों से जूझ रही है। शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में बुलाई गई समीक्षा बैठक बेहद तूफानी रही। बैठक में पंजाब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के बीच तीखी बहस और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले, जिससे संकेत मिलते हैं कि यह हार कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

इस आंतरिक विवाद की मुख्य वजह पार्टी के दिग्गज नेताओं का चुनाव में प्रदर्शन रहा। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग को उनके अपने ही गढ़ गिद्दरबाहा में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। वारिंग के धुआंधार प्रचार के बावजूद नगर परिषद के 19 वार्डों में से 17 पर आप ने कब्जा कर लिया।

हाईकमान की नजरों के सामने अपने ही गढ़ में हुई इस बड़ी सेंधमारी को लेकर जालंधर के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बैठक में राजा वारिंग की जवाबदेही पर सीधे सवाल उठा दिए। वहीं, चन्नी ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों (चमकौर साहिब और मोरिंडा) में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाई। उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि जब प्रदेश अध्यक्ष का अपना ही घरेलू मैदान ढह गया हो तो पार्टी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को कैसे तैयार करेगी?

वारिंग का बचाव और रंधावा का पलटवार

राजा वारिंग ने गिद्दरबाहा में मिली हार का ठीकरा सत्ताधारी आम आदमी पार्टी पर फोड़ते हुए आरोप लगाया कि आप ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया है। हालांकि, उनके इस पारंपरिक बचाव को पार्टी के भीतर से ही चुनौती मिल गई। गुरदासपुर के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने वारिंग के तर्क पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सरकारी मशीनरी का ऐसा ही दुरुपयोग था तो फिर कपूरथला और चमकौर साहिब जैसी जगहों पर कांग्रेस कैसे चुनाव जीत गई? इसके बाद वारिंग ने चुनाव के दौरान चन्नी की पंजाब से लंबी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में चन्नी ने निजी कारणों का हवाला दिया। इस बहस ने नेताओं के बीच की आपसी कड़वाहट को और बढ़ा दिया।

प्रताप सिंह बाजवा का वॉकआउट

बैठक के दौरान तनाव तब और बढ़ गया जब पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए। हालांकि पंजाब कांग्रेस के प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने इसे रूटीन बात बताते हुए डाउनप्ले किया और कहा कि फिलहाल नेतृत्व में किसी बदलाव की संभावना नहीं है।

दूसरी तरफ, बाजवा ने शनिवार को सफाई देते हुए वॉकआउट की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "मैंने पंजाब की स्थिति और राजनीतिक परिदृश्य पर करीब 15-20 मिनट बात की। इसके बाद मैंने अनुमति ली और उसी रात जालंधर लौट आया। मेरे गुस्से में बाहर निकलने या वॉकआउट करने की खबरें पूरी तरह बेबुनियाद हैं।"

चौतरफा हार के बावजूद, कुछ सीटों पर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। कपूरथला में मौजूदा विधायक राणा गुरजीत सिंह ने अपना दबदबा कायम रखा। यहां नगर निगम के 50 वार्डों में से 31 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। नवांशहर में शहीद भगत सिंह नगर जिले में पूर्व विधायक अंगद सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके अलावा पठानकोट, मुकेरियां और पट्टी जैसे इलाकों में भी कांग्रेस ने आप को कड़ी टक्कर दी और शिरोमणि अकाली दल (SAD) व बीजेपी को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।

विधानसभा चुनाव के लिए खतरे की घंटी

इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल माना जा रहा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में मिली करारी हार और आंतरिक गुटबाजी कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकती है। नेताओं के बीच जारी यह ब्लेम-गेम कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रहा है। यदि कांग्रेस ने समय रहते अपनी अंदरूनी कलह को शांत कर एक साझा नैरेटिव तैयार नहीं किया तो 2027 के बहुकोणीय मुकाबले में वह आप के सामने अपनी जमीन पूरी तरह खो सकती है।

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