1/8ईरान के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं में शामिल खामेनेई ईरानी समाज में लगभग उतने ही प्रभावशाली थे जितने उनके पूर्ववर्ती अयातुल्ला रूहोल्ला खोमैनी थे, जिन्होंने 1979 में इस्लामी गणराज्य ईरान की स्थापना की थी।

खामेनेई ना सिर्फ ईरान के सर्वोच्च प्रशासक थे बल्कि धर्मगुरु भी थे। ऐसे में उनके समर्थकों की कमी नहीं। ईरान में खामेनेई की मौत पर मातम मनाया जा रहा है। सड़कों पर लोग तस्वीरें लेकर उतरे हैं। उनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं।

यह वही ईरान है जहां कुछ दिनों पहले खामेनेई के विरोध में प्रदर्शन करने वालों सेसड़कों पटी पड़ी थीं। ईरान में अकसर इस तरह के प्रदर्शन देखे जाते हैं।

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि खामेनेई के समर्थक भी बड़ी सख्या में हैं लेकिन अधिकांश ईरानी उन्हें एक मजबूत या सम्मानित नेता के रूप में याद नहीं करेंगे। उनके शासन की विरासत इस्लामी गणराज्य के लिए सभी मोर्चों पर कमजोरी और व्यापक असंतोष के रूप में देखी जाएगी।

वर्ष 1989 में खोमैनी की मृत्यु पर उनके अंतिम संस्कार में लाखों लोग शामिल हुए थे। शोक मनाने वालों ने उनके पार्थिव शरीर को ताबूत से बाहर निकाल लिया था और पवित्र स्मृति चिह्नों को पाने के लिए धक्का-मुक्की की नौबत आ गयी थी। लेकिन खामेनेई के लंबे शासन के बावजूद संभव है कि ईरानियों में उनके प्रति वैसा ही सम्मान देखने को न मिले।

खामेनेई की मौत के बाद 40 दिन की शोक अवधि का ऐलान किया गया है। स्थानीय मीडिया का कहना है कि श्री खामेनेई की मौत के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन, न्यायपालिका प्रमुख और गार्जियन परिषद के एक अन्य न्यायाधीश कुछ समय के लिए देश की बागडोर संभालेंगे।

खामेनेई की बेटी, दामाद और नाती भी हमलों में मारे गयी। फ़ार्स समाचार एजेंसी ने कहा, "सर्वोच्च नेता के घर में जानकार सूत्रों से संपर्क स्थापित करने के बाद,उनकी बेटी, दामाद और नाती की मौत की खबर की दुर्भाग्यवश पुष्टि हो गयी है।" यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि श्री खामेनेई की तीन बेटियों में से कौन मृतकों में शामिल है।

ईरान की सर्वोच्च सुरक्षा संस्था, सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एसएनएससी) ने कहा कि संयुक्त हमले "दुनिया के उत्पीड़कों के खिलाफ लड़ाई में एक बड़े विद्रोह की शुरुआत करेंगे।" रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने खामेनेई के बेटे मोजतबा को सुप्रीम लीडर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
