1/8तापमान में गर्मी बढ़ते ही लोग खुद को कूल रखने और प्यास बुझाने के लिए फ्रिज में ठंडा पानी रखने लगते हैं। फ्रिज का ठंडा पानी प्यास तो बुझा देता है लेकिन सेहत से जुड़ी कई परेशानियों का कारण भी बनने लगता है। जिससे बचने के लिए लोग मटके का पानी पीना पसंद करते हैं। एक नया कोरा घड़ा सिर्फ मिट्टी का बर्तन नहीं होता, बल्कि प्रकृति का अपना एक तरह का 'फ्रीज' है जो पानी को न केवल ठंडा करता है, बल्कि उसे कई जरूरी खनिजों से भी भर देता है। अगर इस साल आप भी गर्मियों में फ्रिज की जगह मटके का पानी पीने का प्लान बना रहे हैं तो सबसे पहले उसे सीजन करने का सही तरीका भी जान लें। अच्छी तरह सीजन किया हुआ मटका ही पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा और मीठा बनाता है।

नया घड़ा खरीदने के बाद, उसे नल के पानी से अंदर और बाहर अच्छी तरह धोएं। ध्यान रहे कि धोने के लिए कभी भी साबुन, डिटर्जेंट या लिक्विड सोप का इस्तेमाल न करें, क्योंकि मिट्टी के रोमछिद्र (pores) इन्हें सोख सकते हैं।

घड़े को तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है उसे पानी से भरकर कम से कम 24 घंटे के लिए छोड़ देना। इससे मिट्टी की गंध निकल जाती है और घड़ा पानी सोखकर मजबूत हो जाता है।

घड़े की बाहरी या भीतरी सतह को साफ करने के लिए किसी सख्त ब्रश या लोहे के जूने का उपयोग न करें। इससे उसके बारीक छेद बंद हो सकते हैं, जिससे पानी ठंडा होना बंद हो जाएगा। केवल हाथों से रगड़कर साफ करना काफी है।

पहली बार मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल करने से पहले, घड़े में थोड़ा सा सेंधा नमक और पानी डालकर उसे हिलाएं और फिर साफ पानी से धो लें। यह मिट्टी की अशुद्धियों को दूर करने में मदद करता है।

मिट्टी के घड़े को हवादार जगह (जैसे खिड़की के पास) पर रखना सबसे अच्छा होता है, क्योंकि यह वाष्पीकरण (evaporation) के जरिए पानी को ठंडा करता है। घड़े के छिद्रों से रिसकर बाहर आया पानी जब हवा के संपर्क में आकर भाप बनता है, तो वह घड़े के पानी की गर्मी सोख लेता है, जिससे पानी ठंडा हो जाता है।

मटके के ऊपर गीला सूती कपड़ा रखने से पानी को लंबे समय तक ठंडा बनाए रखा जा सकता है। यह वाष्पीकरण (evaporation) की प्रक्रिया के माध्यम से मटके की गर्मी को बाहर सोख लेता है और अंदर के तापमान को कम रखता है, जिससे मटके का पानी फ्रिज से भी ज्यादा ठंडा और हेल्दी बना रहता है।

हर 2-3 दिन में घड़े का पानी बदलकर अच्छी तरह साफ पानी से खंगालें। ऐसा करने से घड़े के छिद्र खुले रहते हैं और पानी में किसी भी प्रकार की गंध या चिकनापन पैदा नहीं होता।
