राव बीकाजी द्वारा बसाया गया बीकानेर शहर केवल 'भुजिया' के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और अनसुनी कहानियों के लिए भी जाना जाता है। इस जगह पर ढेरों मंदिर और किले भी हैं। यहां जानिए यहां घूमने की जगहों के अलावा यहां का मौसम और पहुंचने का तरीका।

बीकानेर से 30 किमी दूर करणी माता का मंदिर है, जहां 20,000 से भी ज्यादा काले चूहे रहते हैं। इस मंदिर में सफेद चूहा देखना साक्षात माता के दर्शन के बराबर माना जाता है।

बीकानेर में एशिया का सबसे बड़ा ऊंट अनुसंधान केंद्र है। यहां ऊंटों पर रिसर्च की जाती है। इसके अलावा यहां मिलने वाली ऊंटनी के दूध की आइसक्रीम और चाय काफी फेमस है।

भांडाशाह जैन मंदिर बीकानेर का अनोखा मंदिर है, जो बहुत फेमस है। इस जगह को लेकर कहा जाता है कि यहां की नीव 40 टन शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल करके रखी गई थी। कहते हैं कि आज भी भीषण गर्मी में इस मंदिर के फर्श और दीवारों से घी की महक आती है और फर्श चिकना हो जाता है।

बीकानेर पहुंचना काफी आसान है क्योंकि यह राजस्थान के प्रमुख शहरों और देश की राजधानी से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। बीकानेर हवाई अड्डा शहर से लगभग 13 किमी दूर है। इसके अलावा बीकानेर में दो मुख्य रेलवे स्टेशन हैं। बीकानेर जंक्शन और लालपुल। इसी के साथ राजस्थान रोडवेज और निजी लग्जरी बसें जयपुर, दिल्ली, जोधपुर, जैसलमेर और अजमेर से नियमित चलती हैं।

बीकानेर थार रेगिस्तान के बीचों-बीच है, इसलिए यहां का मौसम गर्मियों में बहुत तपिश भरी होता है। यहां सर्दियां काफी ठंडी होती हैं।

बीकानेर की भुजिया पूरी दुनिया में फेमस है। इस भुजिया की शुरुआत 1877 में महाराजा डूंगर सिंह के राज में हुई थी। आज यह शहर रोजाना करोड़ों रुपये की भुजिया दुनिया भर में एक्सपोर्ट करता है।

राजस्थान के बाकी किलों की तरह ये पहाड़ी पर नहीं बल्कि जूनागढ़ किला जमीन पर बना है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतिहास में इस किले को कभी कोई दुश्मन पूरी तरह जीत नहीं पाया। इसलिए इसे 'अजेय' माना जाता है।
