गट यानी आंतों में हमारे शरीर की इम्यून कोशिकाएं आंतों में भी रहती हैं। अगर आपके पेट में खराब बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं, तो इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिससे बार-बार बीमार होने का खतरा बढ़ता है। इसलिए गट हेल्थ का ध्यान रखना जरूरी है। गट हेल्थ खराब होने पर सेरोटोनिन यानी हैपी हार्मोन पर असर होता है, जिससे चिड़चिड़ापन, तनाव, डिप्रेशन और ब्रेन फॉग महसूस हो सकता है। इसलिए सभी को गट हेल्थ ध्यान में रखकर अपनी मील प्लानिंग करनी चाहिए।

आंतों की अच्छी केयर के लिए दिन की सही शुरुआत होना जरूरी है। इसलिए अपने दिन की शुरुआत एक से डेढ़ कप नॉर्मल टेम्परेचर के पानी से करें। चाहें तो इसमें नींबू का रस या थोड़ा सा ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर मिलाएं। इससे पाचन एंजाइमों को एक्टिव करने में मदद मिल सकती है।

नाश्ते में इडली या सेट डोसा खा सकते हैं। इन दोनों चीजों को घर की बनी नारियल की चटनी के साथ खाएं। डोसे के घोल के फर्मेंटेशन से उसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स खत्म हो जाते हैं और प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स बनते हैं जो पेट के लिए बहुत अच्छे होते हैं।

मटर, गाजर और करी पत्ते से भरपूर वेजिटेबल पोहा या ओट्स उपमा खाएं। इसमें मौजूद करी पत्ते स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन हेल्थ के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

दोपहर का खाना हैवी हो सकता है क्योंकि जब सूरज सबसे ऊपर होता है, तब आपका पाचन सबसे मजबूत होता है। इसलिए अपने खाने में ताजा घर का बना दही या एक बड़ा गिलास मसाला छाछ पिएं। खाने की थाली में एक ज्वार या बाजरे की रोटी शामिल कर सकते हैं, ये प्रीबायोटिक फाइबर से भरपूर होती हैं।इसके अलावा मूंग दाल या मौसमी सब्जी चुनें। इसके अलावा सेब, चुकंदर, गाजर, खीरा, मूली का सलाद खाएं।

शाम को बहुत से लोग तले हुए समोसे या बिस्कुट खाते है। इसकी जगह आप भुने हुए मखाने या अंकुरित मूंग की सलाद की एक छोटी कटोरी खाएं। इसके साथ अदरक-इलायची की कम दूध वाली चाय या सौंफ की चाय पी सकते हैं।

रात का खाना हल्का रखें ताकि सोते समय आपकी आंतें पाचन के बजाय सफाई पर ध्यान दें। आप दाल खिचड़ी को एक चम्मच घी के साथ खा सकते हैं। घी में ब्यूटिरिक एसिड होता है, ये आपकी आंतों की परत की मरम्मत करने में मदद करता है।
