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जल्दबाजी में गरम पानी में भिगोकर छोले उबालने से वे ऊपर से तो गल जाते हैं, लेकिन अंदर से सख्त रहते हैं। छोलों को कम से कम 8-10 घंटे भिगोना जरूरी है ताकि वे पूरी तरह फूलें और मक्खन की तरह मुलायम बनें।

मैदा गूंथने के तुरंत बाद भटूरे बनाने से वे रबर की तरह खिंचते हैं और फूलते नहीं हैं। आटे को कम से कम 2-3 घंटे का रेस्ट दें ताकि भटूरे के आटे में अच्छी तरह खमीर उठे।

छोले का असली रंग और स्वाद मसाले भूनने की कला में है। अगर आप प्याज-टमाटर का पेस्ट कच्चा छोड़ देते हैं, तो ग्रेवी में कड़वापन आ जाता है। मसालों को तब तक भूनें जब तक वे किनारों से तेल न छोड़ दें।

अगर तेल अच्छी तरह गर्म नहीं होगा तो भटूरा तेल सोख लेगा और चिपचिपा और ऑयली बनेगा। भटूरा डालते समय तेल से हल्का धुआं निकलना चाहिए। तेज आंच पर ही भटूरा झटपट फूलकर बाहर आता है।

बाजार जैसे काले छोलों के लिए उबालते समय चाय पत्ती की पोटली या सूखे आंवले का उपयोग जरूर करें। सिर्फ हल्दी डालने से वो गहरा 'पिंडी छोले' वाला लुक नहीं आएगा।

बिना मोयन के भटूरे सूखकर पापड़ जैसे कड़े हो जाते हैं। मैदा गूंथते समय थोड़ा दही और तेल जरूर डालें, इससे भटूरे लंबे समय तक नरम बने रहते हैं।

छोले उबालते समय पानी की मात्रा ज्यादा करने से छोले और ग्रेवी अलग-अलग होने लगते हैं। छोले की ग्रेवी बनाते समय पानी उतना ही रखें कि छोले उसमें बस डूब जाएं। ग्रेवी गाढ़ी करने के लिए थोड़े से छोलों को करछी से मैश करना न भूलें।
