1/10चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व पूरे नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों देवी के अलग-अलग नौ स्वरूपों का पूजन किया जाता है। हर दिन देवी की पूजा खास तरीके से होती है और उन्हें अलग भोग भी अर्पित किया जाता है। माता को चढ़ाई गई हर चीज का एक गहरा अर्थ होता है और ये जीवन में एक पॉजिटिव एनर्जी ले कर आता है। तो चलिए जानते हैं नवरात्रि के कौन से दिन मां को क्या अर्पित किया जाता है और इसके मायने क्या हैं।

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है। इस दिन उन्हें देसी घी का भोग लगाना शुभ माना जाता है। घी को स्वास्थ्य और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए कहते हैं कि देवी को घी अर्पित करने से जीवन में अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इन्हें चीनी या मिश्री का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में खुशियां और मधुरता बनी रहती है।

तीसरे दिन देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा को दूध या दूध से बने मीठे का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख शान्ति बनी रहती है और मन भी शांत रहता है।

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को विशेष रूप से मालपुआ का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि अपनी मिठास की तरह मालपुआ का भोग जीवन में भी मधुरता और खुशहाली ले कर आता है। साथ ही धन में भी वृद्धि होती है।

नवरात्रि का पांचवा दिन मां स्कंदमाता को समर्पित है। मान्यता के अनुसार उन्हें केले का भोग बेहद प्रिय होता है। इसे अर्पित करने से जीवन में आगे बढ़ने के रास्ते खुल जाते हैं और मानसिक और शारीरिक बल में वृद्धि होती है।

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी को शहद अर्पित किया जाता है। कहते हैं शहद का भोग चढ़ाने से जीवन में मधुरता आती है। इसके अलावा आकर्षण और पॉजिटिविटी में भी बढ़ावा होता है।

सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि गुड़ चढ़ाने से जीवन में सकारात्मकता आती है और हर तरह के डर दूर होते हैं। ये मानसिक और शारीरिक बल में वृद्धि करने वाला माना जाता है।

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल चढ़ाना चाहिए। इससे माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। नवरात्रि में नारियल का प्रसाद सबसे जरूरी माना जाता है।

नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री की समर्पित होता है। इस दिन उन्हें हलवा, पूड़ी और काले चने का भोग लगाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में समृद्धि और संतुष्टि की भावना आती है।
