1/7बसंत पंचमी 2026 का पावन पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह दिन हमारी परंपराओं के उन मीठे स्वादों का भी उत्सव है जो पीढ़ियों से हमारी रसोई में रचे-बसे हुए हैं। शास्त्रों की मानें तो मां सरस्वती को पीला रंग बेहद पसंद है। बसंत पंचमी 2026 के दिन 'पीला' रंग शुभता, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए इस दिन रसोई में बनने वाले मां शारदा के भोग में भी पीले रंग की प्रधानता होती है। अगर आप भी मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए बसंत पंचमी के दिन मां शारदा के भोग के लिए कुछ खास बनाना चाहते हैं तो बसंत पंचमी के 6 सबसे लोकप्रिय और पारंपरिक व्यंजन आपके काम आ सकते हैं।

यह बसंत पंचमी का सबसे मुख्य व्यंजन है। बासमती चावल को केसर या हल्दी के साथ पकाकर इसमें चीनी, देसी घी, इलायची और ढेर सारे सूखे मेवे डाले जाते हैं। इसकी सुनहरी रंगत बसंत के आगमन का प्रतीक है।

सूजी या मूंग की दाल का हलवा इस दिन विशेष रूप से बनाया जाता है। इसमें केसर का भरपूर उपयोग किया जाता है ताकि इसका रंग गहरा पीला आए। मां सरस्वती को केसरी हलवा का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पीली और मीठी बूंदी के लड्डू देवी सरस्वती के प्रिय भोगों में से एक हैं। उत्तर भारत में बसंत पंचमी पर मंदिरों और घरों में प्रसाद के रूप में इन्हें विशेष रूप से वितरित किया जाता है।

केसरिया चाशनी में डूबे हुए गरमा-गरम मालपुआ बसंत के उत्सव को मिठास से भर देते हैं। बंगाल और बिहार जैसे क्षेत्रों में खासतौर पर बसंत पंचमी पर मालपुआ बनाने की पुरानी परंपरा रही है।

सफेद छेने को जब केसरिया चाशनी या गाढ़े पीले दूध में डुबोया जाता है, तो यह बसंत के रंगों में रच-बस जाता है। यह एक शाही मिठाई है जो उत्सव के आनंद को बढ़ा देती है।

दही को बांधकर बनाई गई इस मलाईदार डिश में इलायची और केसर का तड़का लगाया जाता है, महाराष्ट्र और गुजरात में खासतौर पर श्रीखंड को बेहद पसंद किया जाता है। इसका हल्का पीला रंग और ठंडी तासीर बदलते मौसम के अनुकूल होती है।
