1/11बच्चों की परवरिश और गुड हैबिट्स उन्हें बचपन से ही सिखाने की जरूरत होती है। जिससे कि बड़े होकर ना केवल वो फिजिकली हेल्दी रहे बल्कि मेंटली भी स्ट्रांग रहे। बच्चा अगर 10 साल का होने वाला है तो उसमे ये 10 आदतों को जरूर डेवलप कर देना चाहिए। जिससे बड़े होकर उस इन चीजों के फायदे मिले और वो अपने पैरेंट्स को थैंक्यू बोल सके। 10 साल का होने से पहले ही बच्चों में ये 10 आदतों को डेवलप कर देना चाहिए।

पैरेंट्स डिसिप्लिन के नाम पर बच्चों की एनर्जी और कॉन्फिडेंस को दबा देते हैं। बच्चे को हमेशा हंसकर, उत्साह के साथ बोलना सिखाएं। ऐसा करने से उसके अंदर कॉन्फिडेंस डेवलप होगा। बच्चे को हमेशा खुश रहना सिखाएं। हर वक्त उदास रहना, किसी काम को करने का मन ना करना या चुपचाप रहना ऐसा करने से बच्चों को अंदर ना केवल निगेटिव एनर्जी दिखती है बल्कि उनमे कॉन्फिडेंस भी लूज होने लगता है। बच्चा जब 4-5 साल का होने लगे तभी उसमे ये हैबिट डेवलप करें।

पैरेंट्स बच्चे की परवरिश और प्यार के नाम पर उसे किसी चीज के लिए ना नहीं बोलते। जिसकी वजह से बच्चा जिद्दी हो जाता है। बच्चे को ना सुनना सिखाएं। इससे वो ज्यादा मजबूत, समझदार और शांत बनेंगे।

बच्चे चंचल होते हैं और उनमे बहुत सारी एनर्जी होती है। इस एनर्जी के जरिए उन्हें शांत,फोक्सड और ब्रेन को शार्प करना सिखा सकते हैं। हर दिन बच्चे को 10 सकेंड-20 सेकेंड आंख बंद कर शांत बैठने को बोलें। ऐसा करने से बचपन से ही उसमे आदत बनेगी जिससे वो आगे चलकर मेडिटेशन करना सीखेगा और ये आदत उसे मेंटली स्ट्रांग बनाएगी।

बच्चा जब 7-8 साल का होने लगे तो उसे रोज पहनने वाले खुद के कपड़ों को खासतौर पर अंडरवियर को धुलवाने की प्रैक्टिस करवाएं। ये आदत बच्चे को आत्मनिर्भर और कॉन्फिडेंट दोनों बनाएगी।

बच्चे एक वक्त भी खाली नहीं बैठना चाहते। वो जैसे ही बोर होते हैं टीवी, मोबाइल, गेम खेलने लगते हैं। बच्चे को रोजाना दस-पंद्रह मिनट तक बोर होने दें। इससे बच्चों के दिमाग में कुछ क्रिएटिव चीजें आएंगी। कुछ समय खाली रहने से बच्चे क्रिएटिव बनेंगे।

बच्चे को हर दिन नहाने के बाद 20 सेकेंड भगवान के आगे प्रार्थना करना सिखाएं। अपने इष्टदेव का नाम जप करने के लिए कोई मंत्र, श्लोक, लाइन कुछ भी जरूर सिखाएं। जो वो भगवान के सामने बोलें। इससे बच्चे का मन पॉजिटिव दिशा में रहेगा और ये आदत उसे ज्यादा सॉफ्ट बनाने में मदद करेगी।

बच्चा 5 साल से ज्यादा का हो रहा तो उसे साफ-सफाई की आदत डेवलप करें। टेबल पोछना, अपने सामान व्यवस्थित तरीके से रखना। घर की गंदगी को समेटना जैसे छोटे काम करना सिखाएं। बच्चे जब सफाई करना सीखते हैं तो वो गंदगी भी कम करने लगते हैं और उनमे जिम्मेदारी का भाव आता है।

बच्चे को हर दिन सुबह पानी पिलाने की आदत डलवाएं। शुरुआत में एक,दो घूंट पीते-पीते वो एक गिलास पानी पीना शुरू कर देगा। ये आदत बच्चे की हेल्थ को सही रखने में मदद करेगी।

बच्चे को अन्न की बर्बादी ना करना सिखाएं। उसे सिखाएं कि जितना खाने की इच्छा हो बस उतना ही लें और जितना प्लेट में है उसे खाकर खत्म करे क्योंकि जूठा खाना फेंका जाएगा और अनाज की बर्बादी होगी। ये आदत बच्चे को जिम्मेदार और ज्यादा डिसिप्लिन रहना सिखाती है।

बच्चे को सोकर उठने के बाद अपना बिस्तर खुद ठीक करना सिखाएं। चादर को फोल्ड करना, बिस्तर पर बिछी चादर को ठीक करना। ये काम सिखाने से बच्चे के अंदर सफाई की हैबिट डेवलप होगी।
