1/91960 का वो दौर था जब इंडस्ट्री के बड़े एक्टर्स जैसे राज कपूर, दिलीप कुमार, राज कुमार और मनोज कुमार जैसे एक्टर्स के बीच जबरदस्त टक्कर हुआ करती थी। आपसी रिश्ते मीठे थे लेकिन बड़े पर्दे पर इनकी फिल्में एक दूसरे को चैलेंज कर रही थीं।

उस समय राज कपूर एक्टिंग के अलावा डायरेक्शन, एडिटिंग और खुद ही फिल्में प्रोड्यूस करते थे। ऐसे में वो खुद को अपना सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते थे। वो अपने आगे किसी दूसरे एक्टर को इतना बड़ा मल्टी टैलेंट एक्टर नहीं समझते थे। लेकिन मनोज कुमार ने उनकी इस सोच को गलत साबित कर दिया था।

दरअसल, 1965 के भारत- पाकिस्तान युद्ध के बाद मनोज कुमार की मुलाकात उस समय के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से हुई। वो मनोज कुमार की देशभक्ति फिल्मों से बेहद प्रभावित थे। उन्होंने मनोज कुमार को जय जवान जय किसान नारे पर फिल्म बनाने का सुझाव दिया ।

लाल बहादुर शास्त्री के सुझाव को गंभीरता से लेते हुए मनोज कुमार ने ‘उपकार’ फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार की। इस स्क्रिप्ट में देश के जवान और किसान को खूबसूरती के साथ पेश किया गया। किसानों की मेहनत को स्क्रीन पर दिखाया गया जिससे देश इस फिल्म और कहानी से जुड़ गया।

फिल्म की कहानी लिखने के बाद मनोज कुमार ने ही इसकी कास्ट फाइनल की। फिल्म में मनोज कुमार ने लीड किरदार निभाया था। उनके अलावा आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा और एक्टर प्राण जैसे एक्टर्स को अहम किरदार दिए गए।

इस फिल्म में एक्टिंग करने के साथ डायरेक्शन का काम भी खुद मनोज कुमार ने संभाला। उस समय ये बड़ी जिम्मेदारी थी। पहले राज कपूर ही ये काम करते थे।

जब ये बात राज कपूर को पता चली कि मनोज कुमार एक्टिंग के साथ डायरेक्शन में भी कर रहे हैं तो उन्होंने एक्टर से कहा कि या तो उन्हें एक्टिंग पर ध्यान देना चाहिए या डायरेक्शन पर क्योंकि हर कोई राज कपूर नहीं हो सकता।

लेकिन मनोज कुमार को खुद पर यकीन था। 11 अगस्त 1967 को उनकी फिल्म उपकार रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया। ‘मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरा मोती’ जैसे गीत अमर हो गए।

फिल्म के सुपरहिट होते ही राज कपूर ने मनोज कुमार से मुलाकात पर कहा कि वो आज तक खुद से कम्पटीशन कर रहे थे। लेकिन अब किसी और से मुकाबला करने का मौका मिला है।
