1/8आशा भोसले अपनी वर्सेटिलिटी के लिए मशहूर हैं। अपनी आवाज के जादू से पूरी दुनिया को मोह लेने वाली आशा भोसले को हर कोई बेहद प्यार करता है। आशा ताई के नाम से मशहूर सिंगर ने करीब 8 दशक से अधिक के करियर में कई सुपरहिट गाने दिए हैं।

रोमांटिक सॉन्ग हो, सैड सॉन्ग हो या फिर डांस नंबर्स हर टाइप के गानों में उनकी आवाज ऐसी फिट बैठती है कि मानों उन्हीं के लिए ही बना हो। 92 साल की आशा को दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड और पद्म विभूषण अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। वहीं, साल 2011 में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।

आशा भोसले के बारे में ये बात कम लोग ही जानते होंगे कि म्यूजिक की हिस्ट्री में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली सिंगर वो ही हैं। आशा भोसले ने 1980 में पंचम दा यानी आरडी बर्मन से शादी की थी। यह उनकी दूसरी शादी थी। आशा और पंचम की जोड़ी ने तीन दशकों तक साथ काम करते हुए कई हिट गाने दिए।

आशा और आरडी बर्मन के हिट गानों का जब भी जिक्र होगा 'आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा' ये गाना हमेशा ही याद किया जाएगा। फिल्म 'तीसरी मंजिल' के इस गाने के बनने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और मजेदार किस्सा है।

बता दें कि पंचम दा चाहते थे कि ये गाना आशा अपनी आवाज में रिकॉर्ड में करें। पहले तो ये गाना आशा भोसले को बाकी गानों की तरह बेहद सिंपल और सरल लगा, लेकिन जैसे ही वो इस गाने के 'आह आह आजा, आह आह आजा' वाले हिस्से पर पहुंची, तब उन्हें महसूस हुआ कि ये उतना भी आसान नहीं, जितना वो सोच रही थीं।

इस गाने के लिए उन्हें लंबी रिहर्सल की जरूरत है। नतीजा यह हुआ कि आठ दिन रिहर्सल में लगे, क्योंकि इसके लिए अपनी सांसों पर कंट्रोल रखना जरूरी था। एक बार आशा जब 'इंडियन आइडल' के मंच पर पहुंची थी तब उन्होंने इस गाने के पीछे का मजेदार किस्सा सुनाया था।

अशा भोसले ने बताया था, 'जब मैंने गाना सुना, तो मैं 'अरे बाप रे' जैसी हो गई। मुझे इस गाने की प्रैक्टिस और तैयारी में आठ दिन लगे थे।' आशा ने आगे कहा, 'एक बार तो मेरा ड्राइवर मेरे मुंह से 'आह आह आजा, आह आह आजा' सुनकर मुझे अस्पताल ले जाने वाला था, क्योंकि उसे लगा कि जिस तरह से मेरी सांसे चल रही थी, मैं किसी मेडिकल इमरजेंसी में फंस गई हूं, लेकिन उसे क्या पता था कि यह अपने समय के सबसे लोकप्रिय गानों में से एक का यादगार एक्सप्रेशन बनने वाला है।'

बता दें कि 'आह आह आजा' गाने को आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने गाया था। इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। इसे शम्मी कपूर और आशा पारेख पर फिल्माया गया था और इस फिल्म के डायरेक्टर विजय आनंद थे और फिल्म के प्रोड्यूसर नासिर हुसैन।
