1/7हिंदी फिल्मों में कई यादगार गाने जैसे ‘आज मेरे यार की शादी है’, ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’, ‘किस्मत के खेल निराले मेरे भैया’, ‘चंदा मामा दूर के’, और ‘तुजे सूरज कहूं या चंदा’ एक पिता की उम्मीदों से भरा था।

म्यूजिक कंपोजर रवि शंकर शर्मा को इंडस्ट्री में सिर्फ रवि नाम से ही जाना जाता था। उन्होंने हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के गानों में अपनी आत्मा उतार दी हो जैसे। 1955 से लेकर 2005 तक उन्होंने फिल्मों में गाने बनाए।

रवि के म्यूजिक का ही जादू था कि उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड में 7 बार नॉमिनेशन मिला और 2 बार उन्होंने अवार्ड जीता। उन्होंने फिल्म घराना, खानदान और मलयालम फिल्मों के लिए यादगार गीत बनाने के लिए अवार्ड जीता। खानदान फिल्म का गाना ‘तुम ही मेरे मंदिर’ और घराना फिल्म का गाना ‘दादी अम्मा दादी अम्मा मान जाओ न’ मशहूर हुए।

रवि को भारत सरकार की तरफ से साल 1971 में पद्म श्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था। लेकिन सिंगर का अंतिम सफर दुखों से भरा हुआ था। रवि जी की पत्नी कांति उन्हें जल्द छोड़ गई। 1983 में उनका निधन हो गया। उसके बाद रवि अपने जीवन में जैसे अकेले ही पड़ गए।

रवि के तीन बच्चे थे। दो बेटियां और एक बेटा अजय शंकर शर्मा। पत्नी के निधन के बाद रवि की देखभाल की जिम्मेदारी बेटे अजय पर थी। अजय ने साल 2000 में एक्टर्स वर्षा उसगांवकर और इसके बाद परिवार में विवाद की खबर सामने आई।

वर्षा उसगांवकर को आपने नाना पाटेकर और राज कुमार की फिल्म तिरंगा में देखा होगा। ऐसी खबरें सामने आई थी कि म्यूजिशियन रवि के बेटे अजय और एक्ट्रेस बहू वर्षा उसगांवकर ने उन्हें यातनाएं दी। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि रवि ने बेटे और बहू पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया और पुलिस में शिकायत दर्ज की।

बेटे अजय और बहू वर्षा से अलग होने के बाद उनकी देखभाल के लिए दोनों बेटियां आगे आई। दोनों बेटियों ने बूढ़े पिता की उनके आखिरी के दिनों में देखभाल की। अंत में 7 मार्च 2012 को सिंगर का निधन हो गया।
