1/8दरअसल बात है साल 1964 की। उस समय डायरेक्टर-प्रोड्यूसर एसडी नारंग फिल्म ‘शहनाई’ बना रहे थे। इस फिल्म के म्यूजिक का काम रवि को सौंपा गया था।

पहले के समय में म्यूजिक कंपोजर बोल लिखने से पहले धुन तैयार कर लेते थे।फिर धुन के आधार पर गाना लिखा जाता था। ऐसे में म्यूजिक कंपोजर रवि ने धुन बनाने के बाद इसे शब्द देने का काम राजेंद्र कृष्णन को दे दिया।

राजेंद्र कृष्णन ने फिल्म इंडस्ट्री में यादगार गाने दिए थे। फिल्ममेकर्स, म्यूजिक डायरेक्टर्स को उनकर पर काफी भरोसा था। उन्होंने ईना मीना डीका जैसे पॉपुलर सॉन्ग को शब्द दिए थे। उनके गानों की लिस्ट लंबी थी।

ऐसे में जब उन्हें फिल्म शहनाई की एक धुन के लिए गाना लिखने का काम दिया गया तो उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। ये आसान धुन नहीं थी।

दरअसल, ये धुन फिल्म के लीड एक्टर्स बिश्वजीत और एक्ट्रेस राजश्री के रोमांटिक पलों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी।ये गाना भी उन्हीं पर फिल्माया जाना था।

ऐसे में राजेंद्र कृष्णन अपने काम पर लग गए। गीतकार की एक आदत थी कि वो अक्सर अपने बेडरूम के बेड पर एक किनारे टिक कर अपने गीतों को शब्द देते थे।

राजेंद्र कृष्णन अपनी डायरी और पेन ले कर गीत लिख ही रहे थे कि तभी उनकी पत्नी बाथरूम से नहाकर आई और अपने गीले बालों का पानी गीतकार पर झटक दिया। गीले बालों के पानी की बूंदे राजेंद्र कृष्णन और उनकी डायरी पर जा गिरी।

इसके बाद जो हुआ उसने हिंदी फिल्मों को एक आइकॉनिक गाना दे दिया। राजेंद्र कृष्णन पत्नी को देखकर मुस्कुराए और उन्होंने पत्नी के गीले बालों पर लिखा ‘ना झटकों जुल्फ से पानी ये मोती फूट जाएंगे’। ये गाना आज भी आइकॉनिक है।
