Lyricist Anand Bakshi considered an unknown person's letter as his biggest award throughout his life, read why एक अनजान शख्स की चिट्ठी को जिंदगी भर अपना सबसे बड़ा अवार्ड मानते रहे गीतकार आनंद बक्शी, जानिए क्या लिखा था
More
Hindi Newsफोटोमनोरंजनएक अनजान शख्स की चिट्ठी को जिंदगी भर अपना सबसे बड़ा अवार्ड मानते रहे गीतकार आनंद बक्शी, जानिए क्या लिखा था

एक अनजान शख्स की चिट्ठी को जिंदगी भर अपना सबसे बड़ा अवार्ड मानते रहे गीतकार आनंद बक्शी, जानिए क्या लिखा था

राजेश खन्ना से लेकर शाहरुख खान तक के लिए गाने लिखने वाले आनंद बक्शी को अपने फिल्मी करियर में 41 बार फिल्मफेयर अवार्ड का नॉमिनेशन मिला। लेकिन अवार्ड मिले सिर्फ 4। लेकिन वो मरते दम तक एक अनजान चिट्ठी को अपना सबसे बड़ा अवार्ड मानते रहे। जानिए आखिर क्या लिखा था उस चिट्ठी में।

Usha ShrivasThu, 24 July 2025 12:59 PM
1/9

आनंद बक्शी

बॉलीवुड के पॉपुलर सॉन्ग जैसे ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’, 'दिल तो पागल है', 'भीगी भीगी रातों में', 'हद कर दी आपने', 'ओये राजू' समेत 'कभी बेकशी ने मारा','शुरू हो रही है प्रेम कहानी' जैसे सुपरहिट गाने लिखने वाले आनंद बक्शी को जीवन में सिर्फ चार फिल्मफेयर अवार्ड मिले। लेकिन उनका सबसे बड़ा अवार्ड एक चिट्ठी थी।

2/9

बॉलीवुड गीतकार आनंद बक्शी

बॉलीवुड गीतकार आनंद बक्शी का फिल्मी सफर 1945–2002 तक रहा। इस दौरान उन्होंने कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के लिए यादगार गाने लिखे। ये गाने इतने मशहूर हुए कि सुपरस्टार राजेश खन्ना की पहली पसंद बन गए।

3/9

अमर गीत

करीब 50 साल के अपने फिल्मी करियर में उन्होंने 300 फिल्मों के लिए 6000 से अधिक गाने लिखे। इन गानों के लिए उन्हें 41 बार फिल्मफेयर अवार्ड का नॉमिनेशन मिला। लेकिन अवार्ड मिले सिर्फ चार।

4/9

बेटे राकेश बक्शी

उनके बेटे राकेश बक्शी ने अपने एक इंटरव्यू में पिता को आई एक चिट्ठी का खास किस्सा बताया। उन्होंने बताया पिता जी कहा करते थे कि मेरे जाने के बाद उन्हें जीवन में जो चार अवार्ड मिले हैं उनसे तुम अपना घर सजाना। मेरा असली अवार्ड तो वो चिट्ठी है।

5/9

अवार्ड तो वो चिट्टी है

आनंद बक्शी ने अपने बेटे राकेश बक्शी को बताया था कि मेरा असली अवार्ड तो वो चिट्टी है जिसे मैं अपने मरने के बाद अगले जन्म तक साथ ले जाऊंगा।

6/9

 अनजान शख्स की चिट्ठी

राकेश बक्शी ने बताया कि उनके पिता को बहुत साल पहले एक चिट्ठी आई थी। एक अनजान शख्स ने वो चिट्ठी लिखते हुआ उसमें अपनी जिंदगी का दुख उतार दिया था।

7/9

चिट्ठी का सार

राकेश बक्शी ने उस चिट्ठी का सार बताया जिसमें अनजान शख्स ने लिखा था, ‘मैं जिंदगी से तंग आ गया था। मेरे पास काम नहीं था, पैसे नहीं थे। मुझे नहीं पता था मैं कैसे घर जाऊं। ऐसे में रेल की पटरी पर लेट गया कि इस रोज रोज शर्मिंदगी से तो अच्छा है’।

8/9

ये चिट्ठी नहीं अवार्ड है

शख्स ट्रेन के इंतजार में था कि अब कुछ ही देर में सब खत्म, सारी शर्मिंदगी से पीछा छूट जाएगा। लेकिन फिर एक चमत्कार होता है। रेलवे ट्रैक से जुड़ी एक बस्ती थी। वहां किसी के घर में बज रहे रेडियो से एक गीत गूंजता है। गीत था, 'गाड़ी का नाम ना कर बदनाम, पटरी पर रख कर सर को हिम्मत ना हार। कर इंतजार आ लौट जाए घर को। गाड़ी बुला रही है सीटी बजा रही है’।

9/9

अगले जन्म तक लेकर जाऊंगा

बस इस गीत के बोल सुनते ही शख्स पटरी से उठता है। और आत्महत्या का ख्याल दिमाग से निकाल वापस जिंदगी के दुखों से लड़ने निकल पड़ता है। इस चिट्टी के मिलने के बाद उन्होंने अपने बेटे से कहा था कि यही वो चिट्टी है जिसे मैं अपने अगले जन्म तक लेकर जाऊंगा।