1/7हिंदी सिनेमा के कई गाने ऐसे हैं, जिनका एक अलग ही इतिहास है। एक ऐसा ही गाना लता मंगेशकर का है। लता ने अपने करियर में कई आइकॉनिक गाने इस इंडस्ट्री को दिए हैं।

एक ऐसा ही गाना आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जसकी मूल कॉपी सुनकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी रो पड़े थे। आइए जानते हैं गायिका के इस गाने से जुड़े किस्सों के बारे में-

लता मंगेशकर के हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वो 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाना है। ये गाना चीन युद्ध में देश की सीमाओं पर प्राण गंवाने वाले शहीदों की स्मृति में यह गीत लिखा गया था। ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि इस गाने को बेहद ही कम समय में लिखना था और इस काम को प्रदीप जी ने पूरा किया था।

प्रदीप जी ने इस गाने की दस या बारह पंक्तियां नहीं, बल्कि सौ से भी ज्यादा पंक्तियां लिखी थीं। हालांकि, इसमें से महज सोलह पंक्तियां ही गाने में ली गई। गाने के एक-एक बोल ने लोगों के दिलों को छुआ।

'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने को लता मंगेशकर ने जितने फील से गाया है, वो अपने आप में बहुत खास है। कवि प्रदीप ने बाद में बताया कि जब वो माहीम बीच मुंबई पर टहल रहे थे, तब ये शब्द उनके दिमाग में आए। तब न उनके पास पेन थी और ना कागज। उन्होंने पास से गुजर रहे एक अजनबी से पेन मांगा। फिर सिगरेट डिब्बी के एल्युमिनियम फॉयल पर इसे लिखा।

'ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी' गाना आज भी लोगों के अंदर एक जोश भर देता है। ये गाना आज भी देश के लिए कुर्बान हुए शहीदों की याद दिलाता है। ये गाना सुनने में जितना भावुक है, गाने में भी उतना ही भावुक था। दरअसल लोगों की आंखों में आंसू भरने वाला यह गीत खुद लता मंगेशकर और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की आंखें भी नम कर गया था।

आपको बता दें कि 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाने के लिए पहली पसंद लता मंगेशकर नहीं, बल्कि आशा भोसले थीं। इस गीत की रिहर्सल आशा से करवाई गई थी। लेकिन जब लता ने इस गाने के सुना तो उन्होंने इस गाने को गाने की अपनी इच्छा जाहिर की। हालांकि, इस पर आशा ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई और यह गीत इतिहास बना।
