last 8 days of meena kumari s life, she knew about her death, wanted to live life मीना कुमारी की जिंदगी के वो आखिरी 8 दिन, कमरे को ताला लगाकर कह दिया था खुदा हाफिज
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मीना कुमारी की जिंदगी के वो आखिरी 8 दिन, कमरे को ताला लगाकर कह दिया था खुदा हाफिज

एक्ट्रेस मीना कुमारी की जिंदगी के वो आखिरी आठ दिन किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं थे। लिवर की गंभीर बीमारी से पीड़ित मीना जानती थीं कि अब अंतिम समय आ गया है। हॉस्पिटल जाने से पहले मीना ने अपने कमरे को ताला लगा दिया था। बहनों से लिपटकर कहा खुदा हाफिज। 

Usha ShrivasMon, 7 July 2025 12:12 PM
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महज़बीन उर्फ मीना कुमारी

महज़बीन बानो के नाम से पैदा हुईं मीना कुमारी को हिंदी सिनेमा ने ट्रेजेडी क्वीन का नाम दिया। मीना कुमार 1939 से लेकर 1972 फिल्मों में काम किया। एक वो दौर आया जब वो इंडस्ट्री पर राज कर रही थीं और अंतिम समय में ऐसा भी हुआ जब उन्हें पूछने वाला कोई नहीं बचा।

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लिवर सिरोसिस

मीना कुमारी की जिंदगी में इतने दुख थे कि इन्हें भुलाने के लिए उन्होंने शराब का सहारा लिया और फिर लिवर की बीमारी से मौत को गले लगा लिया। उन्हें लिवर सिरोसिस हो गया था। मीना के जीवन पर किताब लिखने वाले विनोद मेहता ने उनके आखिरी 8 दिनों का जिक्र किया है।

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24 मार्च 1972

38 साल की मीना का निधन 31 मार्च 1972 को हुआ था। उससे ठीक आठ दिन पहले 24 मार्च को वो अपनी बड़ी बहन खुर्शीद और छोटी बहन महलिका जिसे मधु के नाम से जानते थे, के साथ ताश खेलते हुए कह रही थीं कि अब उनका अंतिम समय आ गया है। उनकी बड़ी बहन ने कहा वो बड़ी हैं पहले उनकी मौत आएगी। छोटी बहन बोली मैं मरूंगी पहले।

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25 मार्च 1972

25 मार्च शनिवार। मीना ने अपनी बहन खुर्शीद से कहा कि अब उनका कोई काम अधुरा नहीं है। उन्होंने अपनी सभी फिल्में पूरी कर ली हैं। उन्होंने अपनी बहन को बताया कि उन्होंने उनके बच्चों के लिए भी कुछ छोड़ा है। उस रात मीना को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। ये मीना की जिंदगी का आखिरी शनिवार था। वो दर्द में तड़प रही थीं।

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26 मार्च 1972

26 मार्च रविवार। मीना की तबीयत बिगड़ रही थी। उनका इलाज कर रहे डॉक्टर शाह को बुलाया गया। खुर्शीद ने एक्ट्रेस के पति रह चुके कमाल अमरोही को भी बहन की तबीयत के बारे में बताया। सब चाहते थे मीना ठीक हो जाए।

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27 मार्च 1972

27 मार्च सोमवार। डॉक्टर शाह और डॉक्टर मोदी ने मीना कुमारी को हॉस्पिटल में एडमिट होने का सुझाव दिया। लेकिन एक्ट्रेस अपने घर में आखिरी सांसे लेना चाहती थीं। वो हॉस्पिटल के माहौल से तंग आ चुकी थीं। ऐसे में बड़ी बहन खुर्शीद ने मीना को मनाया और अगले दिन हॉस्पिटल में भर्ती होने की बात कही।

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28 मार्च 1972

28 मार्च मंगलवार। मीना ने अपनी बहन खुर्शीद से पूछा 'हमारे पास कितने रुपए हैं'। खुर्शीद ने कहा '100' मीना ने कहा इतने कम रुपए में हम इतने महंगे नर्सिंग होम में कैसे जा सकते हैं। मीना ने अपनी बहन से कहा कि प्रोड्यूसर प्रेम जी को फोन करो। एक्ट्रेस ने प्रेम जी की फिल्म दुश्मन में काम किया था। ऐसे में उनकी फीस बकाया थी। मीना की हालत जानते हुए प्रोड्यूसर ने तुरंत 10 हजार रुपए भिजवा दिए।

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28 मार्च 1972

28 मार्च को मीना आखिरी बार तैयार हुई थीं। उन्होंने बाल कंघी किए और अपने कमरे में ताला लगाया। मीना ने अपनी बहन खुर्शीद से कहा कि मेरे मरने के बाद मुझे पहले मेरे इस कमरे में लाना और फिर से ताला लगा देना। मीना ने अपने परिवार को देखा और कहा खुदा हाफिज।

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29 मार्च 1972

29 मार्च बुधवार। मीना की तबीयत और खराब होती जा रही थी। लेकिन उन्होंने अपनी बहनों से कहा कि वो वापस आएंगी और तीनों साथ ताश खेलेंगे। बड़े डॉक्टर्स की टीम मीना के इलाज में लग गई।

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30 मार्च 1972

30 मार्च गुरुवार। मीना की बहन खुर्शीद को 26 नंबर कमरे से चीख सुनाई दी। वो बहन के कमरे तक भागी। मीना कुमारी ने बड़ी बहन से कहा ‘आपा मैं मरना नहीं चाहती। मुझे बचा लो’। खुर्शीद ने बहन को बाहों में लिया ही था कि उनका सिर दूसरी तरफ झुक गया। वो कोमा में जा चुकी थीं।

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31 मार्च 1972

31 मार्च शुक्रवार। खुर्शीद ने देखा मीना का शरीर सफेद पड़ चुका था, नाक में ओक्सीजन की ट्यूब थी। पैरों में ग्लूकोज की सुई लगाई हुई थी। दोपहर ढाई बजे मीना गहरी नींद में जा चुकी थीं। उनकी आखिरी रस्में पूरी की जा रही थीं। 3:24 पर मीना ने एक झटके से आंख खोली अपने आस-पास मौजूद लोगों को देखा और हमेशा के लिए आंखें मूंद ली।

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और खुदा हाफिज

शाम 7 बजे मीना के मृत शरीर को उनके घर लाया गया जहां पहले से हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। उनके आखिरी सफर के लिए उन्हें मक्का से लाया गया कफन पहनाया गया। रात 10:45 तक मीना को दफनाया जा चुका था।