1/10साल 1969 में 'सात हिंदुस्तानी' से डेब्यू करने के बाद अमिताभ बच्चन की शुरुआती कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं। वह इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे।

साल 1973 में आई फिल्म 'जंजीर' अमिताभ बच्चन के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसी फिल्म ने उन्हें बॉलीवुड का 'एंग्री यंग मैन' बनाया और एक सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया।

'जंजीर' की रिलीज के समय फिल्म के को एक्टर प्राण, अमिताभ बच्चन से बहुत बड़े स्टार थे। उस दौर में डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच प्राण का नाम ही फिल्म की सफलता की गारंटी माना जाता था।

आलम यह था कि साउथ इंडिया के डिस्ट्रीब्यूटर्स ने 'जंजीर' को अमिताभ की नहीं, बल्कि 'प्राण की फिल्म' कहकर रिलीज किया था। हर तरफ सिर्फ प्राण के नाम की ही चर्चा थी।

फिल्म की रिलीज के वक्त कोलकाता (तब कलकत्ता) में एक भव्य प्रीमियर का आयोजन किया गया था, जिसमें फिल्म की स्टार कास्ट भी शामिल हुई थी।

जैसे ही स्टार कास्ट सिनेमा हॉल के अंदर पहुंची, वहां मौजूद पूरी भीड़ सिर्फ 'प्राण-प्राण' के नारे लगा रही थी। खुद को नजरअंदाज होता देख अमिताभ बच्चन अपने आंसू नहीं रोक पाए और फूट-फूटकर रोने लगे।

अमिताभ इस बात से बेहद दुखी थे कि रात-दिन इतनी कड़ी मेहनत करने के बाद भी थिएटर के बाहर उनके नाम का कोई नामोलेवा नहीं था और सारा क्रेडिट प्राण को मिल रहा था।

अमिताभ को रोता देख डायरेक्टर प्रकाश मेहरा उनके पास आए और उन्हें संभाला। मेहरा ने उनसे कहा, 'बस फिल्म के बड़े पर्दे पर शुरू होने का इंतजार करो, इसके बाद पूरी दुनिया सिर्फ तुम्हारा नाम जपेगी।'

प्रकाश मेहरा की बात बिल्कुल सच साबित हुई। फिल्म शुरू होते ही अमिताभ बच्चन के 'एंग्री यंग मैन' वाले किरदार ने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए और हर तरफ 'अमिताभ बच्चन' का नाम गूंजने लगा।

'जंजीर' बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही। इसके बाद अमिताभ ने 'शोले', 'दीवार' और 'अमर अकबर एंथनी' जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं और बॉलीवुड के 'शहंशाह' बन गए।
