1/10फिल्म डकैत में अदिवी शेष ने लीड हरी का रोल निभाया है। उन्होंने इस फिल्म पर चार साल की मेहनत की, कोई दूसरी फिल्म पर ध्यान नहीं दिया। वहीं फिल्म में मृणाल ठाकुर सरस्वती यानी जूलिएट के किरदार में नजर आई हैं। जानिए क्यों इस फिल्म कोIMDb पर 7.9 की रेटिंग मिली है।

फिल्म डकैत में डायरेक्टर ने सस्पेंस, थ्रिलर, क्राइम, एक्शन, रोमांस सब कुछ मिलेगा। फिल्म में अनुराग कश्यप, प्रकाश राज समेत कई शानदार एक्टर नजर आएंगे।

फिल्म की कहानी फ्लैशबैक से शुरू होती है। दिखाया जाता है कि हरी जेल में होता है और अपने प्यार की यादों में खोया होता है। अपना बर्थडे कैसे मनाया करता था। लेकिन फिर शुरू में सच सामने आ जाता है कि जिस लड़की से हरी प्यार करता था उसी ने उसे धोखा दिया और गवाही देकर जेल तक पहुंचाया। अब उसे बदला लेना है।

हरी जेल से बाहर निकलने का प्लान करता है और बदला लेने के लिए निकल पड़ता है। वो सरस्वती की तलाश करता है। और जब वो उसका पीछा करता है तो उसे पता चलता है कि वो अब एक डॉक्टर बन चुकी है। उसकी बेटी है और एक पति जो हॉस्पिटल में हैं और उसे अपने पति के हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए पैसों की जरूरत है।

हरी को ये भी पता चलता है कि सरस्वती जिस हॉस्पिटल में काम कर रही है वहां गैर कानूनी तरीके से अंग बेचे जा रहे हैं। ऐसे में हरी प्लान बनाता है और सरसवती के पास जाता है। सरस्वती इतनी सालों बाद हरी को सामने देख हैरान होती है।

आगे हरी प्लान करता है कि वो सरस्वती के साथ हॉस्पिटल में चोरी का प्लान बनाता है और वो सोचता है कि चोरी करके सरस्पती को ही फंसा देगा इससे उसका बदला भी पूरा हो जाएगा। सरस्वती को अपने साथ रख लेता है और उसे अपने प्लान में ड्राइवर बना देता है।

दोनों चोरी करने निकलते हैं। उनके पीछे रेड्डी लग जाता है। पहली चोरी में दोनों के साथ ज्यादा पैसे नहीं लगते। इसलिए वो दोबारा चोरी करते हैं। रेड्डी और स्वामी उनके पीछे लग जाते हैं।

हरी को भास्कर से पता चलता है 13 साल पहले सरस्वती ने उसे बचाने के लिए झूठी गवाही दी थी। उसे ये भी पता चलता है कि जो हार्ट ट्रांसप्लांट होने वाला है वो असल में सरस्वती का ही होने वाला है और उसे इसलिए इतने पैसे चाहिए। हरी के होश उड़ जाते हैं।

सरस्वती फिर से चोरी करती है। लेकिन तभी पुलिस ऑफिसर नाथू उसके पीछे लग जाता है। इसी बीच हरी वहां उसे बचाने आ जाता है। रास्ते में स्वामी मिल जाता है। और सरस्वती को पैसे लेकर भगा देता है।

इस लड़ाई में हरी को पुलिस गोली मार देती है। हरी ने जानबूझकर अपनी जान दे दी क्योंकि वो अपना हार्ट सरस्वती को देना चाहता था। अंत में हरी का हार्ट, सरस्वती को ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है। कहानी का एंड रुला देता है।
