1/8उन दिनों शक्ति सामंत राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर को लेकर फिल्म अमर प्रेम बना रहे थे। इसी दौरान शक्ति सामंत एक पार्टी में शामिल हुए जहां उनकी मुलाकात उस समय के मशहूर गीतकार आनंद बक्शी से हुई। दोनों पहले भी साथ काम कर चुके थे और इंडस्ट्री में मशहूर थे।

पार्टी के दौरान शक्ति सामंत ने आनंद बक्शी से अपनी फिल्म अमर प्रेम के लिए एक इमोशनल गीत लिखने की बात कही। इसी दौरान गीतकार को फिल्म के उस सीन की सिचुएशन भी समझा दी गई।

ये पार्टी देर रात तक चली। और जब शक्ति सामंत अपने घर के लिए रवाना हो रहे थे तो उन्होंने आनंद बक्शी को भी साथ ले लिया। जब दोनों पार्टी वेन्यू से बाहर निकले तो जबरदस्त नजारा था।

उस दिन तेज बारिश थी, तूफान और तेज हवाएं चल रही थी, आकाश में बादल गरज रहे थे, बिजली कड़क रही थी। ऐसे में शक्ति सामंत ने अपनी गाड़ी के अंदर शरण ले ली।

लेकिन आनंद बक्शी अब भी पार्टी के सुरूर में डूबे थे। ऐसा मौसम देखकर उन्हें सिगरेट सुलगाने की तलब हुई। उन्होंने अपनी जेब से माचिस की डिबिया निकाली और सिगरेट फूंकने लगे।

अब जैसे ही आनंद बक्शी माचिस जलाकर कर सिगरेट सुलगाने की कोशिश करते वैसे ही हवा और बारिश से तीली भुज जाए। ऐसा करते-करते उन्होंने आधी माचिस की डिबिया खत्म कर दी। तभी उन्हें दिमाग में ख्याल आया और वो चिल्लाए। उन्होंने गाड़ी में बैठे शक्ति सामंत से कागज और पेन देने को कहा।

इस तेज बारिश और माचिस की बुझती तीली नी अपना काम कर दिया था। आनंद बक्शी के दिमाग में उस सेड सॉन्ग की शुरुआत हो चुकी थी। उस दिन आनंद बक्शी की कलम से 1972 का सबसे पॉपुलर गाना लिखा गया। ये गाना था ‘चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए, सावन जो अग्न लगाए तो उसे कौन बुझाए’।

इस लिखे गीत को पंचम दा का म्यूजिक का साथ और किशोर कुमार की आवाज मिली। इस गाने ने जो कमाल किया वो कई महारथी की कलम से निकले गीत नहीं कर पाए। आज भी ये गाना सुना जाता है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी ने इस गाने में आग लगाने जैसा काम किया।
