Yamuna river pollution delhi jal board focused on 6 drains make plan to in situ treatment know full details यमुना नदी में प्रदूषण घोल रहे इन 6 नालों पर है दिल्ली जल बोर्ड की नजर, क्या है प्लान?, Ncr Hindi News - Hindustan
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यमुना नदी में प्रदूषण घोल रहे इन 6 नालों पर है दिल्ली जल बोर्ड की नजर, क्या है प्लान?

दिल्ली बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, डीजेबी ने इन नालों और इनकी सहायक नालियों के गंदे पानी को साफ करने के लिए तकनीकी समाधान (टेक्नोलॉजिकल सॉल्यूशन) के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' आमंत्रित किया है। ये नाले सीधे साहिबी (नजफगढ़ नाला) और यमुना में गिरते हैं।

Thu, 28 Aug 2025 09:51 AMUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, दिल्ली
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यमुना नदी में प्रदूषण घोल रहे इन 6 नालों पर है दिल्ली जल बोर्ड की नजर, क्या है प्लान?

दिल्ली में यमुना नदी कितनी प्रदूषित है,किसी से छिपा नहीं है। दिल्ली का चुनाव इस एक मुद्दे पर भी लड़ा गया था। रेखा गुप्ता सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए इसके सफाई की डेटलाइन भी तय कर दी है,लेकिन यमुना में जहर घोल रहे नाले टेंशन दे रहे हैं। अब इसके लिए दिल्ली जल बोर्ड ने प्लान बनाया है। DJB यमुना को साफ करने की योजना के तहत छह बड़े नालों में गंदे पानी का वहीं पर (इन-सीटू) ट्रीटमेंट करेगा। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि मुख्य रूप से आईएसबीटी ड्रेन, सप्लीमेंट्री, शाहदरा ड्रेन, दिल्ली गेट ड्रेन, सेन नर्सिंग होम ड्रेन और नजफगढ़ ड्रेन इस प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं

दिल्ली बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, डीजेबी ने इन नालों और इनकी सहायक नालियों के गंदे पानी को साफ करने के लिए तकनीकी समाधान (टेक्नोलॉजिकल सॉल्यूशन) के लिए 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' आमंत्रित किया है। ये नाले सीधे साहिबी (नजफगढ़ नाला) और यमुना में गिरते हैं। इन छह नालों से रोजाना लगभग 1051.59 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रति दिन) गंदा पानी निकलता है, जो कि मौजूदा सीवेज उत्पादन और ट्रीटमेंट की क्षमता से कहीं ज्यादा है।

दिल्ली में यमुना का सबसे प्रदूषित हिस्सा वजीराबाद से ओखला के बीच का 22 किलोमीटर का क्षेत्र है. इसमें दर्जनों नालों का गंदा पानी गिरता है, जिसमें सबसे ज्यादा योगदान नजफगढ़ और शाहदरा नाले का है। एक अधिकारी ने कहा, "हमारा उद्देश्य इको-फ्रेंडली और नई तकनीकों का इस्तेमाल करके सीपीसीबी (CPCB) द्वारा तय किए गए जल गुणवत्ता मानकों को हासिल करना है। अगर इन छह नालों के पानी को साफ कर दिया जाता है, तो यमुना में गिरने वाले गंदे पानी का एक बड़ा हिस्सा साफ हो जाएगा।"

डीजेबी (DJB) द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, इन नालों में हर दिन इतना गंदा पानी साफ करने का लक्ष्य है:

➤नजफगढ़ नाला: 632 एमजीडी

➤सप्लीमेंट्री नाला: 204 एमजीडी

➤शाहदरा नाला: 97 एमजीडी

➤दिल्ली गेट नाला: 86 एमजीडी

➤सेन नर्सिंग होम नाला: 26.32 एमजीडी

➤आईएसबीटी नाला: 6.27 एमजीडी

इनमें से शाहदरा नाला और सेन नर्सिंग होम नाला सबसे ज़्यादा प्रदूषित हैं। शाहदरा नाले में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) 112 मिलीग्राम/लीटर और सेन नर्सिंग होम नाले में 124 मिलीग्राम/लीटर है। इन दोनों नालों में सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) भी बहुत ज़्यादा है, जो क्रमशः 342 मिलीग्राम/लीटर और 327 मिलीग्राम/लीटर तक है।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में बताया है कि इन सभी छह नालों में गंदे पानी को ट्रीट करने के बाद उसका स्तर इस तरह का होगा:

➤बीओडी (BOD): 10 मिलीग्राम/लीटर तक

➤सीओडी (COD): 50 मिलीग्राम/लीटर तक

➤टीएसएस (TSS - टोटल सस्पेंडेड सॉलिड): 10 मिलीग्राम/लीटर तक

➤पीएच (pH) मान: 6.5 से 9.0 के बीच

रिपोर्ट के अनुसार, इसमें फास्फेट का स्तर 2 मिलीग्राम/लीटर और फेकल कॉलिफॉर्म का स्तर 230 एमपीएन/100 मीटर से कम कर दिया जाएगा। कंपनियों को इन छह नालों में से एक या ज्यादा को चुनने की आजादी होगी। एक अधिकारी ने कहा, “वे न सिर्फ प्रोजेक्ट के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करेंगे, बल्कि अनुमानित लागत भी बताएंगे और टेंडर के दस्तावेज बनाने में भी मदद करेंगे। हम यह भी देखेंगे कि नदियों में गिरने से पहले पानी की गुणवत्ता कैसी है, ताकि काम की प्रगति और प्रदर्शन को ट्रैक किया जा सके और नियमों का पालन हो सके।”

दिल्ली में अनुमान है कि पानी की कुल सप्लाई का 80% (990 एमजीडी) हिस्सा गंदे पानी के रूप में वापस आता है। दिल्ली में 20 जगहों पर 37 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) हैं, जिनकी कुल क्षमता केवल 667 एमजीडी पानी को साफ करने की है। दिल्ली इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार, शहर की क्षमता का उपयोग सिर्फ 565 एमजीडी है और सीवेज ट्रीटमेंट में 227 एमजीडी का अंतर है, जो नालों, जल निकायों और यमुना में गिरता है।

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