कौन हैं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा, जिनसे केजरीवाल को न्याय की उम्मीद नहीं; भाजपा से जोड़ दिया
दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों सुर्खियों में हैं। ना सिर्फ इसलिए कि दिल्ली के कथित शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती पर वह सुनवाई कर रही हैं, बल्कि इसलिए भी कि आम आदमी पार्टी (आप) ने उनकी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों सुर्खियों में हैं। ना सिर्फ इसलिए कि दिल्ली के कथित शराब घोटाले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी गई चुनौती पर वह सुनवाई कर रही हैं, बल्कि इसलिए भी कि आम आदमी पार्टी (आप) ने उनकी निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अरविंद केजरीवाल ने तो शराब घोटाले का केस उनकी बेंच से हटाकर किसी और जज को देने की मांग की है।
एक दिन पहले भाजपा पर निशाना साधते हुए 'आप' ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का भगवा दल से रिश्ता पूछ लिया। भाजपा नेताओं की ओर से यह कहे जाने पर कि 'पिक्चर अभी बाकी है', अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पूछा कि क्या वे कहना चाहते हैं कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मनचाहा फैसला करा सकते हैं? इसके बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने चीफ जस्टिस को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग कर डाली।
ले चुकीं कई डिग्रियां
2022 में दिल्ली हाई कोर्ट की जज बनीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा कई डिग्रियां हासिल कर चुकी हैं और न्यायपालिका में उनका लंबा अनुभव है। डॉ. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज बीए (ऑनर्स) किया है। इसके बाद 1991 में उन्होंने एएलबी की डिग्री ली और 2004 में एलएलएम किया। दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट बताया गया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता ने मार्केटिंग मैनेजमेंट, अडवरटाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस में डिप्लोमा भी किया है। 4 साल तक गहन रिसर्च के बाद 2025 में उन्होंने पीएचडी की डिग्री हासिल की।
मजिस्ट्रेट से हाई कोर्ट की जज तक ऐसा रहा है सफर
24 साल की उम्र में वह मजिस्ट्रेट बनीं और 35वें जन्मदिन पर सेशंस जज का पद हासिल किया। जस्टिस शर्मा प्रशिक्षित न्यायिक मध्यस्थ हैं और इसके जरिए बहुत से केसों का निपटारा कर चुकी हैं। दिल्ली के जिला अदालतों में अपने कार्यकाल के दौरान वह कई सिविल और आपराधिक अदालतों की अध्यक्षता की। स्पेशल जज (सीबीआई), परिवार न्यायालय में प्रिंसिपल जज, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल, महिला कोर्ट और स्पेशल कोर्ट्स में भी सेवाएं दे चुकी हैं। नवंबर 2019 में वह प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज बनी और मार्च 2022 में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज-स्पेशल जज (सीबीआई) की भूमिका निभाई।
चार किताबें भी लिखीं
जस्टिस शर्मा कई किताबें भी लिख चुकी हैं। उनकी पहली किताब 'डोंट ब्रेक आफ्टर ब्रेक अप' है। इसमें उन्होंने उन महिलाओं का मार्गदर्शन किया है जो जिन्होंने एकल रहने का फैसला करती हैं या ब्रेक अप के बाद मुश्किलों का सामना करती हैं। वह न्यायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। 28 मार्च 2022 को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया।




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