दिल्ली की अदालत ने शख्स को किया रेप के आरोपों से बरी, कहा- पीड़िता को सबकुछ पता था फिर भी उसने...
आरोपी की तरफ से पेश हुए वकील प्रदीप नागर ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए रेप का कोई भी अपराध आरोपी के खिलाफ नहीं बनता है, क्योंकि आरोपी और शिकायतकर्ता साल 2017 से आपसी सहमति से और लंबे समय से रिलेशनशिप में थे।

दिल्ली की एक अदालत ने एक शादीशुदा और एक बच्चे के बाप को रेप के आरोपों से बरी कर दिया है। फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने आरोपी के साथ सहमति से संबंध बनाए थे, जबकि उसे यह बात पता थी कि आरोपी शादीशुदा है, लेकिन इसके बाद भी उसने उसके साथ प्रेम संबंध रखा और यौन सम्पर्क भी किया। साथ ही कोर्ट ने शिकायतकर्ता की उस बात को भी नहीं माना, जिसमें उसने आरोपी पर शादी का झांसा देने का आरोप लगाया था।
कोर्ट ने कहा कि दोनों एक-दूसरे को बीते 8 साल से जानते हैं, इस बीच आरोपी की शादी भी हुई, लेकिन तब महिला ने शादी के झूठे वादे की शिकायत दर्ज नहीं कराई। जिसके बाद एडिशनल सेशंस जज (ASJ) प्रियंका भगत ने आरोपी मोहित के खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया और उसे रेप के आरोपों से बरी कर दिया। इस बारे में दिल्ली पुलिस ने साल 2025 में तिमारपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया था।
'आरोपी ने झूठा वादा कर बनाए संबंध'
शिकायतकर्ता महिला का आरोप था कि शख्स ने शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए और अपनी पत्नी से तलाक भी ले लिया, लेकिन इसके बाद भी वह मुझसे किए शादी के वादे से मुकर गया। शिकायतकर्ता महिला आरोपी की पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के संपर्क में भी थी। आरोपी का शादी से एक बच्चा भी है।
'सिर्फ आरोपी के कहने पर मान ली तलाक की बात'
ASJ प्रियंका भगत ने युवक को बरी करने का आदेश जारी करते हुए कहा, 'यह मुमकिन नहीं है कि शिकायतकर्ता ने सिर्फ शादी के वादे पर और आरोपी के यह कहने पर कि उसने तलाक ले लिया है, आरोपी के साथ दोबारा फिजिकल रिलेशन बनाए हों। जबकि वह आरोपी के परिवार से अच्छी तरह से जुड़ी हुई थी और इसके बावजूद उसने तलाक की बात की पुष्टि नहीं की।'
‘महिला ने अपनी तरफ से नहीं की आरोपी के तलाक की पुष्टि’
कोर्ट ने यह भी कहा कि, हमने इस बात को भी ध्यान में रखा है कि शिकायतकर्ता ने नवंबर 2023 में आरोपी के खिलाफ पीछा करने के अपराध के संबंध में पहले ही FIR दर्ज कराई थी, लेकिन उसमें रेप का जिक्र नहीं किया था। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि आरोपी के परिवार से संपर्क में होने के बाद भी शिकायतकर्ता उसके तलाक की बात की पुष्टि नहीं कर सकी।
'आरोपी और शिकायतकर्ता 2017 से रिलेशनशिप में'
उधर आरोपी मोहित की तरफ से पेश हुए वकील प्रदीप नागर ने अदालत में दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए रेप का कोई भी अपराध आरोपी के खिलाफ नहीं बनता है, क्योंकि आरोपी और शिकायतकर्ता साल 2017 से आपसी सहमति से और लंबे समय से रिलेशनशिप में थे।
'पहली बार रिलेशन बनाते समय शिकायतकर्ता शादीशुदा थी'
नागर ने आगे दलील देते हुए कहा कि पहली नजर में रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों से यह बिल्कुल भी साबित नहीं होता है कि शिकायतकर्ता ने इस गलतफहमी में आरोपी के साथ यौन संबंध बनाए थे कि आरोपी उससे शादी करेगा, क्योंकि शिकायतकर्ता पहले से शादीशुदा थी और उसकी शादी उस दिन भी कायम थी जब उसने आरोपी के साथ पहली बार फिजिकल रिलेशन बनाया था।
'जब आरोपी की शादी हो रही थी तब महिला चुप रही'
आरोपी के वकील द्वारा यह दलील भी दी गई कि उनकी रिलेशनशिप के दौरान ही साल 2020 में आरोपी की शादी हुई, जिससे उसका एक बच्चा भी है। हालांकि, जब किसी और लड़की के साथ आरोपी शादी कर रहा था उस समय शिकायतकर्ता ने कोई आपत्ति नहीं जताई, जिससे यह और साबित होता है कि आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच फिजिकल संबंध आपसी सहमति से थे, न कि शादी के वादे के झांसे की वजह से बने थे।
'FIR कराने के बाद भी शिकायतकर्ता संबंध बनाती रही'
साथ ही आरोपी के वकील ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने पहले ही 9 सितंबर साल 2023 को एक FIR दर्ज कराई थी, और उस FIR में रेप का कोई आरोप नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने यह तर्क भी दिया कि FIR दर्ज होने के बाद भी शिकायतकर्ता अगस्त 2024 तक आरोपी के साथ शारीरिक संबंध बनाती रही।




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