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क्यों केंद्र सरकार की ही बड़ी इमारत पर चलाया जा रहा बुलडोजर, होते थे यहां देश के बड़े फैसले

दिल्ली में केंद्र सरकार अपने कुछ इमरातों को गिराने में जुटी हुई है। निर्माण विहार के बाद अब उद्योग विहार को ध्वस्त किया जा रहा है।

Tue, 9 June 2026 08:03 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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क्यों केंद्र सरकार की ही बड़ी इमारत पर चलाया जा रहा बुलडोजर, होते थे यहां देश के बड़े फैसले

दिल्ली में आपने अवैध इमरातों और झुग्गियों पर बुलडोजर चलते खूब देखा है, लेकिन अब केंद्र सरकार की एक बड़ी इमारत को ढहाया जा रहा है, जिसे आजादी के बाद बनाया गया था और दशकों तक यहां से देशभर के लिए बड़े फैसले होते रहे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रॉजेक्ट के तहत उद्योग भवन को ध्वस्त करने का काम शुरू हो गया है। अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार यहां ऑफ-रोड पार्किंग स्थान और यातायात व्यवस्था को बेहतर करना चाहती है।

उद्योग भवन को गिराने की शुरुात निर्माण भवन के बाद हुई है। पास मौजूद इस इमारत को मई के मध्य में ध्वस्त किया गया था। दोनों ही इमारतों का निर्माण आजादी के बाद 1956 से 1968 के बीच किया गया था। केंद्रीय मंत्रियों के लिए दफ्तरों के लिए इनका निर्माण किया गया था। इन दोनों ही इमारतों से मंत्रालयों को कर्तव्य भवन-3 और नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेट्रिएट (CCS) में शिफ्ट कर दिया गया था। जो तुरंत नहीं निकल सके उन्हें अस्थायी रूप से कस्तूरबा गांधी मार्ग, मिंटो रोड और नेताजी नगर में शिफ्ट कर दिया गया था।

क्या-क्या होता था उद्योग भवन में?

उद्योग भवन को सेंट्रल पब्लिक वर्क्स डिपार्टमें (CPWD) के आर्किटेक्ट आरआई आरआई गेहलोत ने डिजाइन किया था और इसका निर्माण 1957 में हुआ था। इस इमारत में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के दफ्तर थे। निर्माण भवन का निर्माण भी करीब इसी दौरान हुआ था और यह लंबे समय तक आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय का मुख्यालय था। यही विभाग सेंट्रल विस्टा का प्रबंधन कर रहा है। इसमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का दफ्तर भी था।

उद्योग भवन और इसके समय बने कृषि भवन, रेल भवन और विज्ञान भवन को सीपीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने डिजाइन किया था। भारतीय वास्तुकला से बनी इमारतों में छज्जे, छतरी और प्रमुख गुबंद नजर आते हैं। आसपास की लुटिंयस इमारतों से मेल खाते हुए इमारतों में भारतीयता की झलक थी।

आगे क्या होगा यहां

इमरातों को गिराए जाने के बाद के प्लान पर एक अधिकारी ने बताया, 'राजधानी के दिल में आगे होने वाले ट्रैफिक को ध्यान में रखकर व्यवस्था की जा रही है। चूंकि यहां सात नई CCS इमारतों का निर्माण चल रहा है। अगले दो साल में इनका निर्माण पूरा हो जाएगा। कुछ नॉन-हैरिटेज इमारतों को हटाकर मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा सरकार सेंट्रल विस्टा के लिए एआई आधारित ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम पर भी काम करना चाहती है।

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