शरणार्थियों के लिए बसाया गया दिल्ली का ‘खान मार्केट’ अब दुनिया के सबसे महंगे बाजार में शुमार
खरीदारी के मामले में इस बाजार की कीमतें आसमान छूने वाली होती हैं। लेकिन, ये बाजार हमेशा से ऐसा नहीं था। क्योंकि आजादी के बाद इस मार्केट को पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए बसाया गया था। पढ़िए खान मार्केट की कहानी।

दिल्ली के दिल में बसा एक बाजार, जो आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर है। खरीदारी के मामले में इस बाजार की कीमतें आसमान छूने वाली होती हैं। लेकिन, ये बाजार हमेशा से ऐसा नहीं था। क्योंकि आजादी के बाद इस मार्केट को पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए बसाया गया था। जहां नीचे दुकानें थीं और ऊपर उन शरणार्थियों के रहने को घर। तो चलिए आज ले चलते हैं, खान मार्केट की सैर पर।
पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए बसाया गया बाजार
सबसे पहले बात करते हैं इसके बसने की। दरअसल देश तो आजाद हो गया, लेकिन एक नई समस्या उभरकर सामने आ गई। वो समस्या थी पलायन और पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को बसाने की। इसका हल निकालने के लिए दिल्ली के दिल में खान मार्केट को दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी द्वारा बसाया गया था।
तारीख की बात करें तो इसे साल 1951 में मूल रूप से भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को बसाने के लिए बनाया गया था। इसका नाम खान अब्दुल गफ्फार खान (Frontier Gandhi) के नाम पर रखा गया, जो महात्मा गांधी के बहुत करीबी थे।

यू आकार के मार्केट के बदल गए रंग-ढंग
इस मार्केट को यू आकार में बसाया गया था। जहां नीचे दुकानें और ऊपर रहने के लिए छोटे-छोटे घरों को बनाया गया था। ये दुकानें और घर खासतौर पर पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को बसाने के लिए ही बनाई गई थीं, इसलिए उन्हें ही अलॉट की गईं। शुरूआती दिनों में यहां किराना, सब्जी, पान, दूध-दही, खान-पान और कपड़ों की दुकानें थी।
मगर देखते ही देखते धीरे-धीरे यहां के बाजार में भारी बदलाव देखा गया। एक ऐसा बदलाव जिसने इस बाजार को आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर कर दिया। इसकी वजह यहां बिकने वाले टॉप ब्रांड के महंगे सामान ही हैं, जिनकी कीमतें आसमान छूने वाली होती हैं। इसकी वजह आस-पास की महंगी और रिहायशी कॉलोनियों से बढ़ता जुड़ाव था।

अब दुनिया के सबसे महंगे बाजार में शुमार
आज ये मार्केट लुटियंस दिल्ली, चाणक्य पुरी, लोधी कॉलोनी, गोल्फे लिंक, सुंदर नगर जैसे महंगे इलाकों की मुख्य बाजार है। आज यह बाजार देश-दुनिया के अमीरों की लाइफस्टाइल और जरूरतों को पूरा करता है। आसमान छूती कीमतों के चलते ही लोअर मिडिल और लोअर क्लास का इंसान यहां से सामान नहीं खरीद सकता है।
इस तरह जैसे-जैसे दिल्ली बढ़ी, खान मार्केट भी बदलता गया। शरणार्थियों की पुरानी दुकानें धीरे-धीरे कैफे, रेस्टोरेंट, बुटीक और इंटरनेशनल ब्रांड्स में बदल गईं। प्रॉपर्टी वैल्यू के हिसाब से खान मार्केट कई बार एशिया का सबसे महंगा और दुनिया के टॉप 20 शॉपिंग स्ट्रीट्स में शुमार हुआ है। यहां बिकने वाले सामान के भाव भी इसी तरह हैं। आज खान मार्केट एशिया के सबसे महंगे रियल एस्टेट मार्केट्स में गिना जाता है।
खान मार्केट की तस्वीरें-









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