छोटी कार और कम सोना लाने के ताने देना क्रूरता, दिल्ली HC का बड़ा फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार लाने और अपेक्षा से कम सोना देने को लेकर पत्नी को बार-बार ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दहेज में छोटी कार लाने और अपेक्षा से कम सोना देने को लेकर पत्नी को बार-बार ताने देना क्रूरता की श्रेणी में आता है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अपराध दहेज प्रताड़ना माना जाएगा। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने यह टिप्पणी मृत महिला के पिता और राज्य सरकार की तरफ से दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की।
याचिकाओं में सेशन कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें महिला के पति को दहेज मृत्यु और क्रूरता के आरोपों से मुक्त किया गया था। पीठ ने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के तहत क्रूरता का आरोप बहाल कर दिया लेकिन दहेज हत्या के तहत दहेज मृत्यु के मामले में सेशन कोर्ट द्वारा दी गई राहत बरकरार रखी है। मृतका के पिता ने आरोप लगाया था कि शादी के शुरुआती दो महीनों के बाद उनकी बेटी को दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।
बड़ी कार के बजाय छोटी कार के ताने
शिकायत में कहा गया कि पति और ससुराल पक्ष यह कहकर ताने देते थे कि बड़ी कार देने का वादा किया गया था लेकिन छोटी कार के लायक ही पैसे दिए गए। साथ ही यह भी कहा जाता था कि दहेज में दिया गया सोना कम था। सत्र अदालत ने यह कहते हुए पति को आरोपों से मुक्त कर दिया था कि कम सोना और छोटी कार जैसे बयान केवल ताने हैं और इन्हें दहेज उत्पीड़न के तहत क्रूरता नहीं माना जा सकता। हालांकि हाई कोर्ट ने इस तर्क से असहमति जताई है।
पीठ ने कहा कि यह कोई एक-दो अलग-थलग टिप्पणियां नहीं थीं बल्कि दहेज की अपेक्षाओं को लेकर मृतका को लगातार ताने दिए जाने के आरोप हैं। ऐसे आरोपों को आरोप तय करने के चरण में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप स्पष्ट और विशिष्ट हैं और सीधे पति से जुड़े हैं। बड़ी कार का वादा करने और कम सोना देने संबंधी टिप्पणियां प्रथम दृष्टया दहेज मांग से जुड़ी प्रताड़ना को दर्शाती हैं।




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