सुप्रीम कोर्ट में अजमेर शरीफ पर PM की ओर से चादर चढ़ाने के खिलाफ याचिका खारिज, CJI ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लंबे समय से चली आ रही रस्म के अनुसार चढ़ाए जाने वाली चादर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इसमें उठाया गया मुद्दा न्यायसंगत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लंबे समय से चली आ रही रस्म के अनुसार चढ़ाए जाने वाली चादर के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें उठाया गया मुद्दा न्यायसंगत नहीं है।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रही इस कार्यवाही का अजमेर कोर्ट में इसी मामले से संबंधित लंबित दीवानी मुकदमे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अजमेर शरीफ दरगाह में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की समाधि मौजूद है।
यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रमुख जितेंद्र सिंह और हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि प्रधानमंत्री की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने की जो परंपरा वर्षों से चली आ रही है, उसे रोका जाना चाहिए। उनका तर्क था कि सरकारी तंत्र या देश के प्रधानमंत्री की ओर से किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल पर इस तरह की परंपरा का निर्वहन नहीं होना चाहिए।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील बरुण सिन्हा ने कहा कि यह धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि चिश्तिया संप्रदाय का इलाका है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मुद्दे से जुड़ा उनका एक मुकदमा पहले से ही दीवानी अदालत में लंबित है। सिन्हा ने 1961 में कोर्ट के दिए फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि कोर्ट ने उस समय यह माना था कि अजमेर दरगाह तकनीकी रूप से कोई ‘धार्मिक स्थल’ नहीं है, बल्कि यह ‘चिश्तिया संप्रदाय’ का एक क्षेत्र है।
यह मुद्दा हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने उठाया था। उन्होंने वकील शशि रंजन कुमार सिंह के माध्यम से 26 सितंबर को अजमेर की एक सिविल कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचक महादेव मंदिर होने से जुड़ी इस याचिका को स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया था।




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