SC grants interim bail to two Delhi riots accused, refers question of UAPA law to larger bench दिल्ली दंगों के दो आरोपियों को SC से जमानत, उमर खालिद का मामला बड़ी बेंच को सौंपा; नियमों पर होगा पुनर्विचार, Ncr Hindi News - Hindustan
More

दिल्ली दंगों के दो आरोपियों को SC से जमानत, उमर खालिद का मामला बड़ी बेंच को सौंपा; नियमों पर होगा पुनर्विचार

पीठ ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार को यह कहते हुए उचित ठहराया कि यह आरोपी-आधारित आकलन, उसे सौंपी गई भूमिका पर आधारित है, न कि इस आधार पर कि अनुच्छेद 21 को गौण माना गया था।

Fri, 22 May 2026 04:56 PMSourabh Jain पीटीआई, नई दिल्ली
share
दिल्ली दंगों के दो आरोपियों को SC से जमानत, उमर खालिद का मामला बड़ी बेंच को सौंपा; नियमों पर होगा पुनर्विचार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के दो आरोपियों अब्दुल खालिद सैफी और तस्लीम अहमद को शुक्रवार को बड़ी राहत देते हुए उन्हें छह महीने की सशर्त अंतरिम जमानत दे दी। साथ ही इस कानूनी सवाल को बड़ी बेंच को भेज दिया कि क्या मुकदमे में देरी और लंबी कारावास की अवधि, जमानत पर लागू वैधानिक पाबंदियों को निष्प्रभावी कर सकती है। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट के दिए अलग-अलग फैसलों में सामने आए विरोधाभासों को देखते हुए बेंच ने इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया। दरअसल विश्लेषण के दौरान अदालत ने पाया कि UAPA के मामलों में जमानत देने में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों में स्पष्ट विरोधाभास देखने को मिला है।

अदालत का यह रुख JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। दरअसल 19 मई को, दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की बड़ी साजिश के आरोपी उमर खालिद को, दो हफ्ते की अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, इससे ठीक एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की एक बेंच ने एक अन्य मामले में टिप्पणी करते हुए कहा था कि UAPA के तहत, जमानत देना सामान्य नियम है और जेल भेजना अपवाद है।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:उमर खालिद को दिल्ली हाईकोर्ट ने दी 3 दिन की अंतरिम जमानत, ये 3 शर्तें भी लगाईं

पिछले आदेश की वैधता पर उठाए सवाल

बेंच ने खालिद की जमानत याचिका खारिज करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश की वैधता पर भी सवाल उठाया और 'यूनियन ऑफ इंडिया बनाम केए नजीब' (2021) मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में संवैधानिक अदालतों को यह अधिकार दिया गया था कि वे UAPA में मौजूद कठोर पाबंदियों के बावजूद, लंबे समय तक जेल में बंद रहने वाले मामलों में जमानत दे सकती हैं।

हालांकि जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिए गए हालिया फैसले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के पांच जनवरी के फैसले की आलोचना की थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:बीमार मां की सर्जरी का हवाला भी नहीं आया काम, उमर खालिद की जमानत अर्जी खारिज

दिल्ली पुलिस ने पूछा सवाल, बड़ी बेंच को भेजने की मांग की

दिल्ली पुलिस ने इस कानूनी प्रश्न को बड़ी बेंच के सामने भेजे जाने का अनुरोध किया कि ‘इस बात की कानूनी समीक्षा की जानी चाहिए कि क्या जेल में लंबा वक्त बीतने और ट्रायल में देरी होने के आधार पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे आतंकवाद विरोधी कड़े कानूनों के तहत जमानत पर लगी वैधानिक पाबंदियों को दरकिनार किया जा सकता है या नहीं।’

पीठ ने दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह फैसला आरोपियों के मूल्यांकन और उनकी भूमिका के आधार पर लिया गया था, न कि इस आधार पर कि अनुच्छेद 21 को गौण माना गया था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:खालिद और शरजील को जमानत न देने के अपने ही फैसले पर SC ने उठाए सवाल, क्या कहा?

शर्तों का उल्लंघन किया तो रद्द हो जाएगी जमानत

उधर दो आरोपियों को छह महीने के लिए दी जमानत के फैसले में अदालत ने कहा कि यदि न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो अभियोजन पक्ष दोनों की जमानत रद्द करने का अनुरोध कर सकता है। पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले को प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए ताकि कानूनी प्रश्न पर आधिकारिक निर्णय के लिए उपयुक्त पीठ का गठन किया जा सके।

इससे पहले शुक्रवार को ही दिल्ली उच्च न्यायालय ने साल 2020 में हुए दिल्ली दंगों में बड़ी साजिश के आरोपी उमर खालिद को एक बड़ी राहत देते हुए तीन दिन के लिए उसकी अंतरिम जमानत मंजूर की थी। खालिद को यह राहत अपने चाचा के इंतकाल के बाद चेहल्लुम की रस्म में शामिल होने और दो जून को होने वाली अपनी मां की सर्जरी की वजह से मिली है। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने कड़े प्रतिबंधों के अधीन खालिद को एक जून से तीन जून तक रिहा करने के आदेश दिए हैं। खालिद पर साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे की कथित साजिश के आरोप में जेल में बंद हैं।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।