SC का सम्मान लेकिन...; उमर खालिद-शरजील को बेल ना देने पर क्या बोले संजय सिंह
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया। हालांकि भागीदारी के स्तर के क्रम का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सोमवार को इनकार कर दिया। हालांकि भागीदारी के स्तर के क्रम का हवाला देते हुए पांच अन्य को जमानत दे दी और कहा कि मामले में सभी आरोपी एक ही पायदान पर नहीं हैं। कोर्ट के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने बिना मुकदमा चले लंबे समय तक जेल में रखे जाने पर चिंता जताई है।
संजय सिंह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर कहा, आम आदमी पार्टी सर्वोच्च न्यायालय और कानून के शासन का सम्मान करती है। लेकिन साथ ही हमारा मानना है कि किसी भी लोकतंत्र में बिना मुकदमा चले किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में रखना गंभीर संवैधानिक चिंताओं को जन्म देता है।
यह भी पढ़ें: ट्रायल में देरी कोई ट्रंप कार्ड नहीं; उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत से इनकार करते हुए SC
अन्य पांच को जमानत
मामले पर फैसला सुनाते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा था कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। ये दोनों जेल में रहेंगे लेकिन अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई है।
अदालत के अनुसार, मुकदमे में देरी कोई तुरुप का इक्का नहीं है जो वैधानिक सुरक्षा उपायों को स्वतः ही दरकिनार कर दे। पीठ ने कहा, दोष के मामले में सभी याचिकाकर्ता समान पायदान पर नहीं हैं। अभियोजन पक्ष के मामले से उभरे सहभागिता के स्तर के क्रम के मद्देनजर न्यायालय को प्रत्येक याचिका की अलग-अलग समीक्षा करने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के संबंध में बताई गई भूमिकाएं अलग-अलग हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, यह कोर्ट इस बात से संतुष्ट है कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सामग्री से याचिकाकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप सिद्ध होते हैं। कार्यवाही के इस चरण में उन्हें जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।
भाषा से इनपुट




साइन इन