गणतंत्र दिवस पर अभेद्य सुरक्षा, AI कैमरे और बुलेटप्रूफ स्टेज से लैस हुई दिल्ली; अलर्ट जारी
गणतंत्र दिवस समारोह के लिए दिल्ली में एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स और बुलेटप्रूफ स्टेज जैसी आधुनिक तकनीक लागू की गई है, साथ ही आतंकी खतरों के मद्देनजर 31 कंट्रोल रूम से कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

गणतंत्र दिवस समारोह की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए इस बार एजेंसियां तकनीक का व्यापक इस्तेमाल कर रही हैं। लालकिले के पास हुए धमाके के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। एजेंसियां किसी भी चूक से बचने के लिए पूरी सतर्कता बरत रही हैं और तकनीक आधारित सुरक्षा प्रणाली पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सुरक्षा कारणों से मैनुअल व्यवस्था की जगह तकनीक आधारित पांच बड़े बदलाव लागू किए गए हैं।
बुलेटप्रूफ स्टेज तैयार किया जा रहा
इस बार सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कंटेनर आधारित बुलेटप्रूफ स्टेज तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री सहित अन्य वीआईपी की सुरक्षा को पूरी तरह अभेद्य बनाना है। साथ ही, सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार पैदल यात्रियों के रूट में अहम बदलाव किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में तीन से चार स्थानों पर रूट बदले गए हैं, जिन्हें पास से गुजरने वाले वाहनों से अलग और छोटा रखा गया है। पहले पैदल यात्रियों के रूट में कोई बदलाव नहीं किया जाता था और पूर्व से तय मार्गों का ही इस्तेमाल होता था। संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए वीडियो एनालिटिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त
नई दिल्ली जिले के एडिशनल पुलिस कमिश्नर देवेश महाला ने बताया कि गणतंत्र दिवस को लेकर खालिस्तानी आतंकी समूहों और बांग्लादेशी आउटफिट्स से जुड़े संभावित हमलों के इनपुट दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों को मिले हैं। इसे देखते हुए एआई तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी गई है। इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त और बहुस्तरीय रखी गई है।

1. कंटेनर आधारित बुलेटप्रूफ स्टेज तैयार
इस बार कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री और अन्य वीआईपी की सुरक्षा के लिए कंटेनर आधारित बुलेटप्रूफ स्टेज तैयार किया गया है। स्टेज को आधुनिक सुरक्षा उपकरण और प्लग-एंड-प्ले तकनीक से लैस किया गया है। इसे कहीं भी आसानी से सकते हैं।
पहले चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया जाता था
पहले स्टेज सुरक्षा मुख्य रूप से सुरक्षाकर्मियों और तकनीकी निगरानी पर निर्भर थी। चारों ओर सुरक्षा घेरा और निगरानी के बावजूद स्टेज बुलेटप्रूफ नहीं होता था। इस बार पहली बार स्टेज में बुलेटप्रूफ कवच जोड़ा गया है।
2. वीडियो एनालिटिक्स से निगरानी हो रही
संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए इस बार वीडियो एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सिस्टम रियल टाइम अलर्ट देगा और डेटा को तुरंत कार्रवाई योग्य सूचना में बदलेगा।
सुविधा उपलब्ध नहीं थी
पहले सीसीटीवी फुटेज मैनुअल तरीके से निगरानी के लिए इस्तेमाल होते थे। सुरक्षा कर्मियों को स्क्रीन पर नजर रखनी पड़ती थी। रिकॉर्डिंग देखने और घटना के बाद संदिग्ध की पहचान संभव होती थी। तत्काल अलर्ट या त्वरित कार्रवाई की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
3. दिल्ली में 31 सीसीटीवी कंट्रोल रूम
नई दिल्ली जिले में 31 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जिससे हर इलाके की निगरानी संभव है। सिस्टम में पहले से संदिग्धों का डेटा मौजूद है। परेड रूट के लिए छह विशेष कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। करीब 1,000 एचडी और फेस रिकॉग्निशन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है।
सिर्फ 14 कंट्रोल रूम थे
पहले जिले में केवल 14 सीसीटीवी कंट्रोल रूम थे। वीडियो एनालिटिक्स नहीं थी और संदिग्धों की पहचान मैनुअल होती थी। परेड मार्ग के लिए तीन विशेष कंट्रोल रूम बनाए जाते थे। फेस रिकॉग्निशन तकनीक कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही उपलब्ध थी।
4. यात्रियों के रूट में बदलाव
सुरक्षा कारणों से पैदल यात्रियों के रूट में तीन-चार बदलाव किए गए हैं। मार्ग को वाहनों से अलग और छोटा रखा गया है। चैनलाइजर, दिशा-सूचक बोर्ड और फ्रिस्किंग प्वाइंट लगाए गए हैं। पूरी जानकारी रक्षा मंत्रालय और दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
कर्मचारी पर दिशा बताते थे
पहले पैदल यात्रियों के रूट में कोई बदलाव नहीं होता था। लोग पूर्व निर्धारित मार्गों से ही कार्यक्रम स्थल तक पहुंचते थे। सुरक्षा कर्मी मौके पर दिशा बताते थे। आधिकारिक वेबसाइट पर रूट की जानकारी नहीं दी जाती थी और मार्ग की जानकारी केवल मौके पर मिलती थी।
5. क्यूआर कोड आधारित पार्किंग सिस्टम
इस बार क्यूआर कोड आधारित पार्किंग सिस्टम लागू किया गया है। करीब 8,000 वाहनों की पार्किंग सुव्यवस्थित होगी। क्यूआर कोड स्कैन करते ही लोग अपने पास की पार्किंग तक पहुंचेंगे। थोड़ी दूरी पैदल चलकर लोग सीट तक पहुंचेंगे।
पहले मैनुअल पार्किंग व्यवस्था
पहले पार्किंग मैनुअली संचालित होती थी। वाहन चालकों को केवल पार्किंग लेवल दिया जाता और सुरक्षाकर्मी मौके पर दिशा बताते थे। ज्यादा वाहन आने पर उन्हें दूसरी पार्किंग में भेजना पड़ता।




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