लाल किला पार्किंग, कनॉट प्लेस या अक्षरधाम; इन जगहों पर धमाका करने की थी साजिश? उठ रहे कई सवाल
करीब 3 घंटे तक पार्किंग में गाड़ी खड़ी रहने के पीछे की वजह पर कई सवाल उठ रहे हैं। पहला, क्या वह आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा था?दूसरा, क्या वह कहीं और धमाका करने की फिराक में वहां खड़ा था?

दिल्ली धमाके में इस्तेमाल हुई कार दोपहर 3.19 बजे गाड़ी की पार्किंग में घुसती है और शाम 6.28 बजे निकलती है। फिर लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास जाकर फट जाती है। डॉक्टर उमर मुहम्मद इस दौरान कार के अंदर ही रहता है। करीब 3 घंटे तक पार्किंग में गाड़ी खड़ी रहने के पीछे की वजह पर कई सवाल उठ रहे हैं। जांच कर रहीं टीमों को शक है कि क्या वह आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा था? या फिर कहीं और धमाका करने की फिराक में वहां खड़ा होकर कुछ और सोच रहा था? हमला को अंजाम देने की लोकेशन को लेकर भी सवाल हैं- क्या कहीं और धमाका करने की साजिश थी?
लाल किला की पार्किंग में धमाका करने का प्लान?
जांच में सामने आई बात ने केस में नया मोड़ ला दिया है। एनडीटीवी रिपोर्ट के मुताबिक- जांच कर रही टीम को सूत्रों के हवाले से पता चला है कि उमर मुहम्मद की प्लानिंग, लाल किला के पास वाली पार्किंग में विस्फोट करने की थी। इसके पीछे की जगह थी, सर्दियों में यहां होने वाली भीड़। लेकिन, वह यह बात भूल गया कि सोमवार को लाल किला की पार्किंग बंद रहती है। इस बात को भूलने की वजह उसकी हड़बड़ाहट बताई जा रही है, क्योंकि उस समय फरीदाबाद में उसके साथी और विसफ्टोक बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल पकड़ा जा चुका था।
पार्किंग में भीड़ नहीं मिलने से हुई निराशा
अनुमान लगाया गया है कि जब उसने देखा कि पार्किंग में भीड़ नहीं है, तो वो निराश हो गया होगा। इसके आगे का प्लान करने लगा होगा कि अब क्या करना है। इसी सोचा-विचारी में उसका इतना समय बीत गया होगा। करीब 3 घंटे बीत जाने के बाद वह पार्किंग से निकला और नेताजी सुभाष मार्ग की तरफ चला गया, जहां जाकर लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रैफिक सिग्नल के पास जाकर विस्फोट हो गया।
क्या कनॉट प्लेस या अक्षरधाम मंदिर निशाना था?
पुलिस जांच में सामने आया है कि धमाका वाले दिन कार, सुबह 8.13 बजे हरियाणा-दिल्ली सीमा पर बदरपुर स्थित टोल प्लाजा पार करती हुई दिखाई देती है। दिल्ली में घुसने के बाद से उमर ने जो रास्ता अपनाया, उसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बदरपुर टोल बूथ से, वह सबसे पहले मयूर विहार जाता है, जहाँ दिल्ली का एक फेमस मंदिर अक्षरधाम है।
वहाँ से, सीधे पुरानी दिल्ली जाने के बजाय, वह एक चक्कर लगाता है और दिल्ली के दिल, कनॉट प्लेस की ओर गाड़ी चलाता है। इस चक्कर ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या कनॉट प्लेस निशाना था या फिर अक्षरधाम मंदिर? जाँचकर्ता आतंकवादी कार की गतिविधियों के बारे में और जानने के लिए कनॉट प्लेस के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं।
उमर सुबह 8 बजे के बाद दिल्ली में दाखिल हुआ था, जबकि विस्फोट लगभग 11 घंटे बाद हुआ था। तब तक उसने एक चक्कर लगाया और एक पार्किंग में तीन घंटे बिताए। एजेंसियाँ इस बात की जाँच कर रही हैं कि इसके पीछे क्या कारण हो सकता है।
उमर के फोन से उठ रहे कई सवाल
पुलिस को पता चला है कि उमर का फोन 31 अक्टूबर को बंद था। विस्फोट से 10 दिन पहले उसकी आखिरी लोकेशन अल फलाह यूनिवर्सिटी थी। जिस रास्ते से उमर दिल्ली आया, उसके सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो उसे एक बार भी फ़ोन इस्तेमाल करते नहीं देखा गया। तो सवाल यह है कि क्या फ़ोन का इस्तेमाल न करना या न रखना प्लान का हिस्सा था?
दूसरा सवाल यह है कि बिना फ़ोन के वह अपने आकाओं से कैसे कॉन्टैक्ट कर रहा था? हो सकता है कि उसे किसी योजना पर टिके रहने और पकड़े जाने की जोखिम को कम करने के लिए फोन न रखने को कहा गया हो। यह भी हो सकता है कि उसके पास किसी और नंबर का फोन था- शायद बर्नर फ़ोन, जो विस्फोट में तबाह हो गया हो। जाँच कर रही टीम तह तक पहुँचने के लिए हर पहलू से जाँच कर रही है।




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