Pharmaceutical companies are making 600-1000 percent profits, Swati Maliwal 600-1000% मुनाफा कमा रहीं दवा कंपनियां, ब्रांड के नाम पर हो रही वसूली; राज्यसभा में बोलीं स्वाति मालीवाल, Ncr Hindi News - Hindustan
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600-1000% मुनाफा कमा रहीं दवा कंपनियां, ब्रांड के नाम पर हो रही वसूली; राज्यसभा में बोलीं स्वाति मालीवाल

उन्होंने पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- कुछ फार्मा कंपनियां दवाइयों पर 600- 1100% तक मुनाफा कमा रही हैं। क्या सरकार इसके लिए कोई स्ट्रॉग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाएगी, जिससे ये मुनाफाखोरी बंद हो।

Tue, 3 Feb 2026 05:01 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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600-1000% मुनाफा कमा रहीं दवा कंपनियां, ब्रांड के नाम पर हो रही वसूली; राज्यसभा में बोलीं स्वाति मालीवाल

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने कुछ दवाई कंपनियों द्वारा की जाने वाली मुनाफाखोरी पर सदन में सरकार से सवाल किया। उन्होंने पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा- कुछ फार्मा कंपनियां दवाइयों पर 600- 1100% तक मुनाफा कमा रही हैं। क्या सरकार इसके लिए कोई स्ट्रॉग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाएगी, जिससे ये मुनाफाखोरी बंद हो।

600-1000% मुनाफा कमा रहीं दवा कंपनियां

स्वाति मालीवाल ने अपने एक्स अकाउंट पर सदन में पूछे गए सवाल का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- “कुछ प्राइवेट फार्मा कंपनियाँ ब्रांडेड दवाइयों (medicines) पर 600% से 1000% तक मुनाफ़ा कमा रही हैं। यह कोई आरोप नहीं, बल्कि संसद की समिति की रिपोर्ट में दर्ज तथ्य है। जहाँ वही दवा generic रूप में 80-90% सस्ती मिल सकती है, वहीं सिर्फ ब्रांड के नाम पर आम आदमी से कई गुना कीमत वसूली जा रही है।”

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दवाईयों पर मची है लूट

शेयर किए गए वीडियो में उन्होंने कुछ दवाओं का जिक्र भी किया, जिनकी कीमत जनता से बहुत ज्यादा वसूली जा रही है। स्वाति ने कहा- “सिट्रिजिन एक कॉमन एलर्जी मेडिसन है, उसका प्राइज 1.52 रुपये है, लेकिन वो 21.60 रुपये में बेची जा रही है। इसी तरह पेन किलर आइवो प्रोफेन का प्राइज 831 रुपये है, लेकिन एमआरपी 4560 रुपये है। इन्सुलिन इंजेक्शन के ब्रांड में 109 पर्सेंट तक का प्राइज़ वेरिएशन है। कुछ जरूरी एंटी बायोटिक्स और लाइफ सेविंग कैंसर ड्रग की कॉस्ट तो लाखों में है।”

ये मुनाफाखोरी बंद हो

ट्वीट में आगे लिखा- बीमार इंसान के पास मोलभाव का विकल्प नहीं होता, उसे किसी भी हाल में दवा चाहिए और इसी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है। स्वास्थ्य कोई व्यापार नहीं, अधिकार है। गरीब और मध्यम वर्ग की गाढ़ी कमाई दवा कंपनियों के मोटे मुनाफ़े में नहीं जानी चाहिए। वीडियो में आखिरी में उन्होंने पूछा- "मैं जानना चाहती हूं क्या सरकार इसके लिए कोई स्ट्रॉग रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाएगी, जिससे ये मुनाफाखोरी बंद हो और आम आदमी को भी सस्ती दवाई मिल सके।"

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