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पाकिस्तान से कैसे दिल्ली तक पहुंचता था चीन और तुर्की वाला हथियार, किन्हें सप्लाई

चीन और तुर्की में बने बेहद आधुनिक और खतरनाक पिस्टल पंजाब-जम्मू कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान दिल्ली तक भेज रहा था। जांच में सामने आया है कि हथियारों की खेप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी में सक्रिय लॉरेंस बिश्नोई, बम्बिहा, गोगी, हिमांशु भाऊ जैसे गैंगस्टरों तक पहुंचाई जानी थी।

Sun, 23 Nov 2025 06:21 AMSudhir Jha हिन्दुस्तान
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पाकिस्तान से कैसे दिल्ली तक पहुंचता था चीन और तुर्की वाला हथियार, किन्हें सप्लाई

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के संगठित नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। इस गिरोह का संचालन विदेश से हो रहा है। चीन और तुर्की में बने बेहद आधुनिक और खतरनाक पिस्टल पंजाब-जम्मू कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान दिल्ली तक भेज रहा था। जांच में सामने आया है कि हथियारों की खेप दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी में सक्रिय लॉरेंस बिश्नोई, बम्बिहा, गोगी, हिमांशु भाऊ जैसे गैंगस्टरों तक पहुंचाई जानी थी। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, जब्त हथियारों में शामिल (पीएक्स-5.7) मॉडल की पिस्टल का इस्तेमाल तुर्किए की स्पेशल फोर्सेज करती हैं। इससे संकेत मिलता है कि गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करों से जुड़े हैं।

अबतक की जांच में इस गैंग का मुख्य संचालक अमेरिका में बैठा जसप्रीत उर्फ जस्सा बताया जा रहा है, जो पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के साथ सीधे संपर्क में है। हथियारों की खेप ड्रोन के जरिए भारत में भेजी जा रही थी। ड्रोन से हथियार निर्धारित स्थानों पर गिराए जाते थे। खेप को कार्बन पेपर में लपेटा जाता था ताकि स्कैनर और डिटेक्टर की पकड़ में नहीं आएं। गिरोह के गुर्गे मनदीप और दलविंदर को उस लोकेशन से हथियार उठाकर दिल्ली में डिलीवरी करने के निर्देश मिलते थे।

रडार से बचकर ऐसे होती थी तस्करी

पाकिस्तान स्थित तस्कर सीमा के संवेदनशील इलाकों में देर रात हथियार और अन्य प्रतिबंधित सामान गिराने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाणिज्यिक ड्रोन का इस्तेमाल करते हैं ताकि ये सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में नहीं आएं। ये ड्रोन रडार से बचने के लिए आमतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ते हैं। छोटे होने के बावजूद उच्च मूल्य वाले पेलोड ले जाते हैं।

हथियारों की खेप सीमा बाड़ के पास पूर्व चयनित जीपीएस स्थानों पर गिराई जाती है, जहां से भारतीय सीमा के रिसीवर और स्थानीय बदमाश उसे उठा लेते हैं। हैंडलर एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से सामान गिराने का समन्वय करते हैं और पैटर्न का पता लगाने से बचने के लिए बार-बार स्थान और समय बदलते रहते हैं। नेटवर्क स्थानीय सहयोगियों पर निर्भर करता है, जो पुलिस की आवाजाही पर नजर रखते हैं और खेप को तत्काल प्रभाव से उठा लेते हैं। हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए भुगतान हवाला चैनलों या प्रॉक्सी खातों के माध्यम से किया जाता है।

मुख्य सरगना और उसकी कड़ी

फरार गैंगस्टर सोनू खत्री उर्फ राजेश कुमार के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया है। एजेंसियों को उसके अमेरिका में होने का पता चला है। जबकि उसका करीबी पाकिस्तानी खुफिया इकाई आईएसआई से जुड़ा जसप्रीत उर्फ जस्सा हथियारों की व्यवस्था करता है।

ऐसे आरोपियों को धरा

पुलिस को 19 नवंबर को गुप्त सूचना मिली थी कि हथियारों की बड़ी खेप रोहिणी सेक्टर-28 में आने वाली है। सूचना पर पुलिस ने खाटू श्याम मंदिर के पास तलाशी के दौरान पंजाब नंबर की एक सफेद कार को रोका। कार सवार मनदीप, दलविंदर की निशानदेही पर स्पीकर बॉक्स से बैग मिला, जिसमें आठ पिस्टलें मिलीं। इसके बाद सप्लायर रोहन तोमर एवं अजय को भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिनसेे दो पिस्टल और आठ कारतूस मिले। गिरोह ड्रोन से हथियार पंजाब-जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में गिरवाता था, जिन्हें आगे भेजा जाता था।

अब तक चार गिरफ्तार
पुलिस ने इस मॉड्यूल से जुड़े जालंधर निवासी मनदीप सिंह और दलविंदर कुमार, बागपत के रोहन तोमर और अजय उर्फ मोनू को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 10 विदेशी अर्ध-स्वचालित पिस्टलें और 92 कारतूस बरामद किए गए हैं।

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