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नोएडा और ग्रेनो में 500 ई-बसों का प्रोजेक्ट बंद, अब नए सिरे से बनेगी परिवहन योजना

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में 500 ई-बसें चलाने की योजना भारी घाटे के अनुमान के कारण बंद कर दी गई है, अब शासन स्तर पर नई संस्था (SPV) के माध्यम से कम बसों के संचालन पर विचार होगा।

Thu, 25 Dec 2025 07:47 AMAnubhav Shakya हिन्दुस्तान, ग्रेटर नोएडा
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नोएडा और ग्रेनो में 500 ई-बसों का प्रोजेक्ट बंद, अब नए सिरे से बनेगी परिवहन योजना

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 500 ई-बसें चलने से पहले ही योजना बंद हो गई। अब शासन स्तर से नए सिरे से बसों को चलाने की योजना तैयार की जाएगी।

शासन ने इस साल जून में टेंडर खोल कर बसें चलाने के लिए दो कंपनियों के नाम चिह्नित किए थे। इसमें पहली कंपनी ट्रेवल टाइम मोबिलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड थी। इस कंपनी की नौ मीटर लंबी बस थीं। कंपनी 54.90 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बसें चलाती। दूसरी डेलबस मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी थी। इसकी 12 मीटर लंबी बसें थीं और कंपनी इनको 67.99 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से चलाती। अधिकारियों ने बताया कि योजना बंद होने के कारण अब इन कंपनियों से अनुबंध खत्म कर दिया गया है। कंपनियों को उनकी जमा ईएमडी राशि वापस की जाएगी।

शासन स्तर से ही अब बसों के संचालन के लिए विशेष प्रायोजन संस्था (एसपीवी) के गठन किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि 500 में से 300 बसें नोएडा, बाकी 100-100 बसें ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में चलाई जानी प्रस्तावित थीं। योजना के मुताबिक नोएडा में 13 रूट पर 257, ग्रेटर नोएडा में नौ रूट पर 196, यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में दो रूटों पर 52 ई-बसें चलाई जानी प्रस्तावित थीं।

इस बारे में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम का कहना है कि फिलहाल 500 बसें चलाने की योजना को बंद कर दिया गया है। अब शासन स्तर से ही नए सिरे से बसों को चलाने की प्रक्रिया होगी।

हर महीने घाटा होता

प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो इन बसों के संचालन से हर महीने नौ करोड़ रुपये का घाटा होता। बस चलाने वाली कंपनियों को प्राधिकरण की तरफ से वायबिलिटी गैप फंडिंग(वीजीएफ) के तौर पर करीब नौ करोड़ रुपये का अनुमानित भुगतान किया जाना प्रस्तावित था। तीनों प्राधिकरण के अधिकारी इतने बड़े खर्च को करने से बच रहे थे।

अब कम बसें ही चलेंगी

प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अगले चरण में जब भी बसों को चलाने की योजना तैयार होगी, तब पूरे जिले में 100-125 से अधिक बसें नहीं चलेंगी। इनमें करीब 50 बसें नोएडा में चलेंगी।

सरकारी परिवहन सेवा कमजोर

नोएडा-ग्रेनो में कुछ रूट पर ही बेहद कम संख्या में रोडवेज बसें उपलबध हैं। बाकी लोगों को निजी रूप से ऑटो, कैब आदि के भरोसे रहना पड़ता है।

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