no judge can hear cases against government and politicians CBI opposes recusal plea of Arvind kejriwal ऐसे तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे...; केजरीवाल के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चों वाली बात पर CBI, Ncr Hindi News - Hindustan
More

ऐसे तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे...; केजरीवाल के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चों वाली बात पर CBI

दिल्ली आबकारी नीति मामले में जज स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग वाली याचिका का सीबीआई ने विरोध किया। जांच एजेंसी ने कहा कि जज शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में होने के आधार पर यह मांग मान ली जाती है तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं।

Thu, 16 April 2026 08:01 PMSubodh Kumar Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
ऐसे तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे...; केजरीवाल के जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चों वाली बात पर CBI

दिल्ली आबकारी नीति मामले में जज स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग वाली याचिका के विरोध में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें पेश कीं। जांच एजेंसी ने कहा कि जज शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार के पैनल में होने के आधार पर केजरीवाल की यह मांग मान ली जाती है तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सीबीआई ने गुरुवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं का विरोध करते हुए अपनी लिखित दलीलें पेश कीं। इन याचिकाओं में दिल्ली आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खुद को सुनवाई से अलग करने की मांग की गई है।

सरकारों या नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं कर पाएंगे

सीबीआई ने कहा कि अगर केजरीवाल की यह दलील मान ली जाती है कि जस्टिस शर्मा को इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए, क्योंकि उनके बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं, तो वे सभी जज अयोग्य हो जाएंगे जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं। ऐसे जज फिर उन सरकारों या नेताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं कर पाएंगे। सीबीआई द्वारा दायर लिखित बयान में कहा गया है कि पूरे देश के सभी विद्वान न्यायाधीश, ऐसे किसी भी सरकार या किसी भी राजनीतिक नेता से जुड़े मामलों की सुनवाई करने के लिए अयोग्य माने जाएंगे, यदि उनके रिश्तेदार केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी भी सरकारी पैनल में शामिल हैं।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल की एक बात मानी पर क्यों झटका भी लगा; समझें

सुनवाई करने से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा

इसमें आगे कहा गया है कि वे सभी माननीय न्यायाधीश जिनके रिश्तेदार राज्य सरकार, केंद्र सरकार या किसी भी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के पैनल में शामिल हैं, उन्हें संबंधित राज्य सरकारों, केंद्र सरकार या संबंधित पीएसयू से जुड़े मामलों की सुनवाई करने से अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। सीबीआई का कहना है कि केजरीवाल के तर्क के अनुसार, पैनल के सभी वकीलों को मामले सौंपने वाला विधि अधिकारी भी उन सभी न्यायाधीशों के समक्ष पेश होने के लिए अयोग्य हो जाएगा, जिनके रिश्तेदार सरकारी पैनल में हैं।

संस्था पर दबाव बनाने के लिए सोची-समझी चाल

सीबीआई का तर्क है कि केजरीवाल द्वारा दायर किया गया अतिरिक्त हलफनामा (जिसमें उन्होंने जज शर्मा के बच्चों के केंद्रीय सरकारी पैनल में होने का मुद्दा उठाया है) संस्था और व्यक्तियों को और अधिक बदनाम करने और इस प्रतिष्ठित संस्था पर दबाव बनाने के लिए एक सोची-समझी चाल है।

इसके अलावा, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में जस्टिस शर्मा के शामिल होने की केजरीवाल की दलील पर भी सीबीआई ने अपनी बात रखी। सीबीआई का कहना है कि अगर इस दलील को मान लिया जाए तो इसका मतलब यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट का कोई भी जज आम आदमी पार्टी के प्रमुख से जुड़े किसी भी मामले की सुनवाई करने के लिए अयोग्य हो जाएगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:केजरीवाल को मंजूर नहीं जस्टिस स्वर्ण कांता, अदालत में दिखाएंगे ‘वकालत पार्ट-2’

सोशल मीडिया मुहिम चलाई जा रही

सीबीआई के हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जस्टिस शर्मा के खिलाफ एक सोची-समझी सोशल मीडिया मुहिम चलाई जा रही है। अगर वह खुद को इस मामले से अलग कर लेती हैं तो इससे एक बहुत ही गलत मिसाल कायम होगी। बेबुनियाद आरोप लगाने और सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने का यह तरीका किसी भी अदालत के सामने कोई भी वादी अपना सकता है।

ट्रायल कोर्ट के आदेश को सीबीआई ने चुनौती दी है

केजरीवाल 13 अप्रैल को खुद कोर्ट में पेश हुए थे और उन्होंने अपना पक्ष रखा था। बाद में 15 अप्रैल को उन्होंने कोर्ट में एक और हलफनामा दायर किया। इसमें कहा गया था कि जज को इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए, क्योंकि उनके बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में शामिल हैं। एक ट्रायल कोर्ट ने 27 फरवरी को दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। सीबीआई ने इस आदेश को चुनौती दी और अभी जस्टिस शर्मा इस पर सुनवाई कर रही हैं।

जस्टिस शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर रोक लगाई

9 मार्च को जस्टिस शर्मा ने इस मामले में नोटिस जारी किया और उस सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर रोक लगा दी, जिसने इस मामले की जांच की थी।जस्टिस शर्मा ने प्रथम दृष्टया यह भी पाया कि ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में जो कुछ टिप्पणियां की थीं, उनमें से कुछ गलत थीं। उन्होंने ट्रायल कोर्ट को आगे यह निर्देश भी दिया कि वह सीबीआई की एफआईआर पर आधारित पीएमएलए की कार्यवाही को टाल दे।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:हट जाइए क्योंकि आपके बच्चे...; जस्टिस शर्मा के खिलाफ केजरीवाल की नई दलील

केजरीवाल को पक्षपात का संदेह

इसके बाद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, विजय नायर, अरुण पिल्लई और चनप्रीत सिंह रायत ने जस्टिस शर्मा से खुद को इस मामले से अलग करने के लिए अर्जियां दायर कीं। उनका तर्क है कि जस्टिस शर्मा के पिछले आदेशों और जिस तरह से इस मामले की सुनवाई की जा रही है, उससे उनकी तरफ से पक्षपात साफ जाहिर होता है। इसलिए उन्हें इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लेना चाहिए।

13 अप्रैल को केजरीवाल खुद जस्टिस शर्मा के सामने पेश हुए और जज के केस से हटने की अपनी अर्जी पर बहस की। उन्होंने दलील दी कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के आदेशों और कोर्ट के बाहर उनके बर्ताव से उनके मन में शक पैदा हो गया है कि आबकारी नीति मामले में उनकी बेंच के सामने उन्हें निष्पक्ष सुनवाई मिल पाएगी या नहीं।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।