यमुना के बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण पर NGT सख्त, एजेंसियों से जवाब तलब
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण के गंभीर आरोपों को देखते हुए मामले में सख्ती दिखाई है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना के बाढ़ क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण के गंभीर आरोपों को देखते हुए मामले में सख्ती दिखाई है। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने बाढ़ क्षेत्र में सात मंजिला इमारत के निर्माण से जुड़ी शिकायत को पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन से जुड़ा अहम मुद्दा मानते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), संबंधित जिलाधिकारी, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
यह मामला वजीराबाद गांव के निवासी रोहित त्यागी द्वारा दायर एक याचिका के आधार पर दर्ज किया गया। इसमें आरोप लगाया गया है कि मजनूं का टीला स्थित न्यू अरुणा नगर क्षेत्र में यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र और हरित पट्टी में सात मंजिला इमारत का निर्माण किया जा रहा है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित संपत्ति ‘ओ’ जोन श्रेणी में आती है, जहां मास्टर प्लान दिल्ली-2021 के तहत किसी भी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं है।
जिलाधिकारी को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश
एनजीटी ने माना कि बाढ़ क्षेत्र में निर्माण के आरोप पर्यावरण संरक्षण से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करते हैं। इसी को देखते हुए एनजीटी ने सभी संबंधित सरकारी एजेंसियों व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर उनसे हलफनामे के जरिए जवाब मांगा है। खासतौर पर संबंधित जिलाधिकारी को कथित निर्माण करने वाले व्यक्ति की जानकारी स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी पता लगाने का निर्देश दिया है कि क्या यह अवैध निर्माण वास्तव में यमुना के बाढ़ क्षेत्र में स्थित है। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की है।




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