Supreme Court Orders Fair Appellate Tribunal for Voter List Challenges in West Bengal पश्चिम बंगाल: नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए निष्पक्ष ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश, Delhi Hindi News - Hindustan
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पश्चिम बंगाल: नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए निष्पक्ष ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ अपीलों के लिए स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण बनाने का आदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने को न्यायपालिका का अपमान बताया और कहा कि इससे न्यायिक अधिकारियों की ईमानदारी कमजोर होती है।

Tue, 10 March 2026 07:26 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल: नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर सुनवाई के लिए निष्पक्ष ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने ‌मंगलवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ लोगों की अपीलों पर सुनवाई और निपटारा करने के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अगुवाई में स्वतंत्र और निष्पक्ष अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत नाम हटाने और शामिल करने के लिए दाखिल दावों और आपत्तियों पर विचार करने के लिए तैनात किए गए न्यायिक अधिकारियों के निष्पक्षता पर सवाल उठाना ‘न्यायपालिका का अपमान है।’मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और आर महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की भूमिका सवाल उठाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और याचिकाकर्ता से कहा कि आपने इस तरह की अर्जी दाखिल करने की हिम्मत कैसे की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ‘न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न्यायपालिका का अपमान है और इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना, उनकी ईमानदारी को कमजोर करने का प्रयास है। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस अर्जी से पता चलता है कि आपको न्यायिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं है... किसी को भी न्यायिक अधिकारियों से सवाल करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। देश के प्रधान न्यायाधीश होने के नाते ‘मैं इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करूंगा।’ पीठ ने यह नाराजगी उस अर्जी पर जाहिर की, जिसमें कहा गया है कि न्यायिक अधिकारियों को मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के दावों /आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए त्रक्ष।सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार और भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के बीच बढ़ते तकरार के चलते 20 फरवरी को असाधरण आदेश पारित करते हुए इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने या शामिल करने के लिए दाखिल लगभग 80 लाख दावों/ आपत्तियों पर निर्णय लेने के लिए राज्य के मौजूदा और पूर्व जजों को तैनात करने का आदेश दिया था। बाद में इस काम में ओडिश और झारखंड के मौजूदा और पूर्व जजों को तैनात करने की अनुमति दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से यह भी कहा था कि वे राज्य में SIR प्रोसेस में इलेक्टोरल रोल से हटाए गए लोगों के 80 लाख क्लेम और ऑब्जेक्शन को संभालने के लिए झारखंड और ओडिशा से ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को बुलाएं।अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए पूर्व जजों से आग्रह करेंसुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से उच्च न्यायालय के पूर्व चीफ जस्टिस और दो या तीन पूर्व जजों, खासकर कलकत्ता हाईकोर्ट या पड़ोसी राज्यों से, से अपीलीय न्यायाधिकरण में काम करने का अनुरोध करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा है कि एक बार सिफारिश मिलने के बाद, निर्वाचन आयोग को ऐसी अपीलों की सुनवाई के लिए उन्हें अपीलीय न्यायाधिकरण के तौर पर अधिसूचित करना होगा। पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरण में कितने सदस्य होंगे, यह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे।10.16 लाख दावों/ आपत्तियों का हुआ निपटाराकलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर पेश रिपोर्ट पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में 9 मार्च की शाम तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का सामना कर रहे लोगों के 10.16 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा कर दिया। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग से एसआईआर के काम में लगे न्यायिक अधिकारियों को सभी तरह की लॉजिस्टिक सहयोग दें। इसके साथ ही, निर्वाचन आयोग को आदेश दिया है कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बगैर ऐसी कोई शर्तें या आदेश जारी नहीं करें, जिससे इस प्रक्रिया में रुकावट आए।तकनीकी समस्या को दूर किया जाएसुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को एसआईआर के काम करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करने के लिए कहा है। पीठ ने न्यायिक अधिकारियों के लिए नए लॉगिन आईडी तुरंत बनाए जाएं ताकि वोटर लिस्ट में आसानी से बदलाव हो सके। इसने यह भी कहा कि निर्वाचन आयोग का कोई भी न्यायिक अधिकारी अपील में न्यायिक अधिकारियों द्वारा दावा और आपत्तियों पर लिए गए फैसलों की समीक्षा नहीं कर सकता।700 न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं एसआईआर में कामसुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि एसआईआर के काम के लिए पश्चिम बंगाल से 500 और ओडिशा और झारखंड से लगभग 200 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। साथ ही कहा कि 8 मार्च, 2026 तक करीब 700 लॉगिन आईडी बना ली गई थीं ताकि सेंसिटिव जिलों में न्यायिक अधिकारियों को लाने और उनकी रीडिप्लॉयमेंट में मदद मिल सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक अधिकारियों को लॉजिस्टिक और टेक्निकल दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, जिसके बारे में कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि ये दिक्कतें निर्वाचन आयोग के स्तर पर पैदा हुई थीं।

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